दिल्ली।लगभग डेढ़ दशक के बाद भारत की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में भारी जनसैलाब उमड़ा है। इससे पहले वर्ष 2011 में अन्ना आंदोलन में इस तरह की भीड़ देखने को मिली थी। दुर्भाग्य यह है कि देशभर से रामलीला मैदान में जुटी लाखों लोगों की भीड़ वाला यह आंदोलन भारत के मैन मीडिया को नज़र नहीं आ रहा है। रामलीला मैदान में चल रहा आंदोलन सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। शिक्षक और कर्मचारियों का कहना है कि इतनी भारी भीड़ देश की मैन मीडिया की नज़र में ग़ायब है, इससे पता चलता है कि इसको गोदी मीडिया कियूं कहा जाता है,
कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों के लाखों शिक्षक कर्मचारियों ने NPS निजीकरण भारत छोड़ो, पुरानी पेंशन बहाल करो, NMOPS जिंदाबाद, अटेवा जिंदाबाद के नारे लगाए. अलग राज्यों के कर्मचारियों ने अपने-अपने अंदाज में सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की. इस दौरान ‘जो OPS बहाल करेगा. वही देश पर राज करेगा’ के नारे लगे.
आपको बता दें कि रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से कई लाख लोगों की भीड़ जमा हुई। इस आंदोलन का नेतृत्व देशभर में पुरानी पेंशन बहाल करने की माँग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन के नेता कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार रविवार को रामलीला मैदान में 2 लाख भी अधिक लोग एकजुट हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक आन्दोलन में नेताओं के भाषण चल रहे थे। देश के अधिकतर बुद्धिजीवी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि रामलीला मैदान में शुरू हुआ ऐतिहासिक आंदोलन गोदी मीडिया की नज़रों में कुछ भी नहीं है। देश के तमाम बड़े बड़े तथाकथित TV चैनलों से इस आंदोलन की कवरेज पूरी तरह ग़ायब है।यह अलग बात है कि इस समय रामलीला मैदान का आंदोलन सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है।
भारत अपने कर्मचारियों को क्यों नहीं दे सकता पेंशन
NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने पेंशन शंखनाद महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर सकते हैं तो विश्व मे आज भारत आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है तो वह अपने कर्मचारियों को पेंशन क्यों नही दे सकता है.
क्या है आंदोलन का मुद्दा
यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में इतना बड़ा जनसैलाब किस मुद्दे को लेकर उमडा है। जैसा कि आप जानते ही होंगे कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने सरकारी कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। किसी भी क्षेत्र की सरकारी नौकरी में पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है, यानि कि रिटायर होने के बाद सरकार किसी भी तरह की पेंशन नहीं देगी। इसलिए सरकारी नौकरी में कार्यरत देशभर के कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी सरकार से लगातार पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग करते आ रहे हैं। यह देश के करोड़ों कर्मचारियों का आंदोलन है, जो पिछले कई सालों से चलाया जा रहा है।

























