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अभी-अभी मोदी सरकार फिर करने वाली है नोट बन्दी जैसा एक और बड़ा फैसला,करलें तैयारी नहीं तो होगी बड़ी परेशानी

नई दिल्ली। चुनावी गड़बड़ियों और फर्जी वोटिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग ने मतदाता पहचान पत्र को अब आधार संख्या से जोड़ने की बड़ी पहल की है। हालांकि, यह मुहिम पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी। यानी कोई भी व्यक्ति अपने वोटर कार्ड को आधार से लिंक कराने या नहीं कराने के लिए स्वतंत्र होगा। इसके आधार पर किसी भी व्यक्ति का आवेदन न तो निरस्त होगा और न ही वोटर लिस्ट से उसका नाम हटाया जाएगा। बावजूद इसके एक अगस्त 2022 से देशभर में इससे लेकर मुहिम शुरू होगी। जिसमें प्रत्येक घर से इससे जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।

चुनाव आयोग के मुताबिक इसे लेकर एक विशेष फार्म तैयार कराया गया है। जिसके जरिए यह जानकारी ली जाएगी। साथ ही सभी राज्यों को तत्परता के साथ इसके अमल के निर्देश भी दिए गए है। आयोग ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदकों के आधार संख्या पर कार्रवाई करते समय तय निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए।

इस दौरान किसी भी परिस्थिति में आधार संख्या सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी के मतदाता का वोटर कार्ड कहीं प्रदर्शित करना जरूरी है, तो आधार से जुड़े विवरण को अनिवार्य रूप से ढक कर प्रस्तुत किया जाए।

पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में इस पहल की दी गई थी मंजूरी

आयोग की इस पहल को चुनाव सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव सुधार को लेकर लंबे समय से जुटे चुनाव आयोग के वोटर कार्ड को आधार संख्या से जोड़ने के प्रस्ताव को पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में मंजूरी दी गई थी। हालांकि, यह मुहिम अभी तक आनलाइन ही चलाई जा रही है। हालांकि, अब इसे घर-घर तक और प्रत्येक वोटर के बीच लेकर जाने की है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने वोटर कार्ड को स्वैच्छिक रूप से आधार से लिंक करने की मुहिम 2015 में शुरू की थी। उस समय 38 करोड़ वोटर कार्ड इससे लिंक भी किए गए थे। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को रोक दिया था।

यह मिलेगा फायदा

वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने का जो बड़ा फायदा मिलेगा उसमें एक व्यक्ति अब दो जगह अपना नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़वा सकेगा। इससे वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। अभी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में शहर में आते है और यहां पर भी वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लेते है। ऐसे में उनका नाम वोटर लिस्ट में दो जगह मौजूद रहता है। इसके साथ ही सही संख्या मिलने से योजनाओं को भी तैयार करने में आसानी होगी।

17 साल से ज्यादा उम्र होते ही वोटर कार्ड के लिए कर सकेंगे आवेदन

चुनाव सुधार की दिशा में आयोग ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है, जिसमें कोई भी व्यक्ति 17 साल से ज्यादा की उम्र पूरी करते ही वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके साथ ही वोटर लिस्ट में अब साल में चार बार यानी हर तीन महीने में नाम जोड़ा सकेगा। ऐसे में उनके 18 की उम्र पूरी होते ही उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। इसके तहत वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए 18 साल की उम्र के पूरा होने का इंतजार नहीं करना होगा।

नए नियमों के तहत आयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने का यह काम एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को होगा। इस बीच आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र इन तारीखों पर जैसे ही 18 साल की होगी, उनका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। अब तक वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए लोगों को एक जनवरी का इंतजार करना होता था। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति एक जनवरी के बाद 18 साल पूरा करते थे, तो उन्हें अगले साल एक जनवरी तक का इंतजार करना होता था। आयोग ने इसके साथ ही राज्यों को मतदान केंद्रों की युक्तीकरण करने, मतदाता सूची में एक ही नाम कहीं बार दर्ज होने जैसे मामले को भी प्रमुखता से निपटाने के निर्देश दिए है। बता दें कि आयोग ने यह पहल तब की जब इस साल के अंत तक गुजरात, हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने की तैयारी है।

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