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युवा संकल्प सेवा समिति ने क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की मनाई जयंती,विचार संगोष्ठी का किया आयोजन ।

बदायूँ।आज युवा संकल्प सेवा समिति बदायूँ द्वारा क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गई ,बरेली रोड स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण पर चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर एक बिचार संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।शुरुआत में दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

संस्था के सचिव पुनीत कुमार कश्यप एडवोकेट व संस्था के सदस्यों ने चंद्रशेखर आजाद के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित किये।उसके बाद एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, गोष्ठी में बिचार प्रकट करते हुए संस्था सचिव पुनीत कश्यप ने बताया कि आज के युवा चन्द्र शेखर आजाद की तरह यदि अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो जाऐ तो कोई भी लक्ष्य युवाओं द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।आगे बोलते हुए श्री कश्यप ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की। वहां उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और ‘जेल’ को उनका निवास बताया।
संस्था के कोषाध्यक्ष योगेंद्र सागर ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद को 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, ‘वन्दे मातरम्‌’ और ‘महात्मा गांधी की जय’ का स्वर बुलंद किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए।
संस्था के सदस्य विशाल वैश्य ने कहा कि आजाद अपने साथियों से कहा करते थे कि वो कभी पकड़े नही जाएंगे और हमेशा आजाद ही रहेगें। वास्तव मे वह गिरफ्तार होने की स्थिति मे एक अतिरिक्त गोली अपने साथ रखते थे, ताकि वह खुद को मार सकें।गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के उपाध्यक्ष योगेश पटेल ने की व संचालन धर्मवीर कश्यप ने किया।
इस मौके पर निखिल गुप्ता, मुनीश कुमार, अरुण पटेल, विश्वनाथ मौर्या, राजेंद्र शाक्य, नितिन कश्यप, श्रीकांत सक्सेना, दीपक भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

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