- टीएमयू फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की ओर से व्यक्तित्व प्रभावशीलता पर वर्कशॉप
- प्रो. सिंह बोले, लर्निंग का प्रथम स्थान घर और परिवार
- व्यक्तित्व वृद्धि में आत्मविश्वास अनिवार्य : डॉ. मेहरोत्रा
- टीचर्स, भावी टीचर्स के संग-संग अभिभावक भी शामिल
एंटरप्रिन्योरशिप-हीलिंग प्वाइंट की परामर्शदाता डॉ. बिंदु सैलोट ने कहा, शब्द ही हमारे व्यक्तित्व को दर्शाता है। हम अपने आपको जिस तरह अन्य लोगों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, उसी प्रकार की छवि लोगों के मन में बन जाती है। हम अपने जीवन में जो भी सीखते हैं, उसका व्यावहारिक उपयोग अवश्य किया जाना चाहिए। यही व्यावहारिक उपयोग वास्तविक रूप से हमारी प्रभावशीतला का घोतक है। डॉ. सैलोट ने बताया, शिक्षक होने के नाते व्यक्तिगत प्रभावशीतला की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि शिक्षकों के व्यक्तित्व के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों का प्रभाव स्टुडेंट्स पर पड़ता है। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की ओर से व्यक्तिगत प्रभावशीलता पर ऑनलाइन आयोजित वर्कशॉप में बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थीं। इससे पूर्व फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन की प्राचार्या डॉ. रश्मि मेहरोत्रा ने मुख्य वक्ता डॉ. बिंदु सैलोट का स्वागत किया। डॉ. सैलोट ने बताया, शिक्षक को शिक्षण वृत्ति में बाई चांस नहीं बल्कि बाई च्वॉइस होना चाहिए। व्यक्तिगत प्रभावशीलता व्यक्ति के स्व से विकसित होती है। इसके लिए व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य सही होना अत्यंत आवश्यक है। आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए अच्छा खाएं, अच्छा लिखें और अच्छा पढ़ें। डॉ. सैलोट बोलीं, क्रोध का वहन मानव के व्यक्तित्व के लिए हानिकारक होता है, इसीलिए माफ़ करना और माफ़ी मांगना हमारे स्वभाव का एक अभिन्न अंग होना चाहिए। यह गुण हमारी व्यक्तिगत प्रभावशीलता में अभिवृद्धि करता है। उन्होंने स्व अनुभूति को विकसित करने की दिशा में सकारात्मक दिनचर्या को अपनाने पर भी जोर दिया। अंत में सवाल-जवाब भी हुए।
छात्र कल्याण निदेशक प्रो. एमपी सिंह ने कहा, बच्चों के लिए लर्निंग का प्रथम स्थान घर और परिवार है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी शिक्षण वृत्ति के प्रति अभिरुचि रखती है। एक दशक पूर्व जहाँ शिक्षण प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रवेशित प्रशिक्षुओं की औसत आयु लगभग 30 वर्ष थी, वहीं वर्तमान में प्रशिक्षित हो रहे प्रशिक्षुओं की औसत आयु 22 वर्ष है, जो इस वृत्ति के साथ-साथ शिक्षण क्षेत्र के लिए एक सुखद अनुभूति है। अब विद्यार्थी शिक्षण वृत्ति को बाई च्वॉइस चुन रहे हैं। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रश्मि मेहरोत्रा कहा, व्यक्तिगत प्रभावशीलता व्यक्तित्व का प्रमुख आयाम है। व्यक्तिगत प्रभावशीलता का मनोविज्ञान केवल आंतरिक दृढ़ विश्वास और प्रेरणा पर आधारित है। व्यक्ति की प्रभावशीलता को बढ़ाने में आत्मविश्वास और आत्मनुभूति का अहम योगदान है। ऑनलाइन वर्कशॉप में एजुकेशन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विनोद जैन, डॉ. अशोक लखेरा, डॉ. रत्नेश जैन एआर श्री दीपक मलिक, श्री नाहीद बी., मोहिता वर्मा, डॉ. सुमित गंगवार, श्री गौतम कुमार, डॉ. सुशील कुमार के संग-संग भावी टीचर्स और अभिभावक भी शामिल रहे। ।


























