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टीएमयू में ली टीबी खात्मे की शपथ

टीबी को डायग्नोसिस करने में पैरामेडिकल स्टाफ का अहम रोल:डॉ. जैन

ख़ास बातें
पूरे विश्व में अब तक 5.5 करोड़ लोग टीबीग्रस्त: विश्व स्वास्थ्य संगठन

पोस्टर, मॉडल, रंगोली और क्विज़ प्रतियोगिताएं भी हुईं

टीबी होने का मुख्य कारण कुपोषण: डॉ.मधुलिका

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज में विश्व टीबी डे पर तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के वाइस प्रिंसिपल डॉ. एसके जैन ने बतौर मुख्य वक्ता कहा, 1882 में सबसे पहले टीबी के वायरस का पता चला था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में अब तक 5.5 करोड़ लोग टीबी से ग्रस्त हो चुके हैं जबकि 28 लाख लोग अपना जीवन गंवा चुके हैं। टीबी को डायग्नोसिस करने में पैरामेडिकल स्टाफ का अहम रोल बताते हुए बोले, ब्लड टेस्ट, बलगम टेस्ट, एक्स-रे, सीटी स्कैन आदि बिना पैरामेडिकल स्टाफ की मदद से नहीं किए जा सकते हैं। डॉ. जैन बोले, इस वर्ष टीबी की थीम- द क्लॉक इज टिकिंग यह संकेत देती है, समय जा रहा है और हमें बहुत कुछ करना है। इस मौके पर पोस्टर, मॉडल, रंगोली और क्विज़ प्रतियोगिताएं भी हुई। इससे पूर्व तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के वाइस प्रिंसिपल डॉ. एसके जैन ने बतौर मुख्य वक्ता, तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की डाइटीशियन डॉ. मधुलिका मोहन ने गेस्ट स्पीकर, कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, डाॅ. अर्चना जैन, श्रीमती कंचन गुप्ता और प्रियंका सिंह ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। सभी अतिथियों को पौधे देकर स्वागत किया गया। विश्व टीबी डे पर टीबी को जड़ से समाप्त करने की शपथ भी ली गई। अंत में विजेताओं को मेडल्स और सर्टिफिकेट्स दिए गए।

क्विज में सरफराज, मोहसिन, निशांत, सचिन और रमन-प्रथम, क्यूरी सिंह, खुशी, प्रेरणा, नितीश, मंतर्णा जैन-द्वितीय, पोस्टर में जूही और अक्षिता-प्रथम, ईशा और देविका- द्वितीय, मॉडल में समर्थक साहा, जैनाब, सरफराज और इति- प्रथम, मानवी, रक्षिता, अक्षता-द्वितीय, रंगोली में नगमा, फौजिया और सुमय्या-प्रथम, टीना, तुषार और खुशबू ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की डाइटीशियन डॉ. मधुलिका मोहन ने बतौर गेस्ट स्पीकर दवा के साथ आहार के महत्व डालते हुए कहा, टीबी का मुख्य कारण कुपोषण है, इसीलिए मरीज का आहार योजनाबद्ध और पौष्टिक होना चाहिए। टीबी के लिए प्रोटीन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। मरीज को कभी मांसाहारी भोजन नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह उसे पचा नहीं पाता है। रोगियों को हमेशा सुपाच्य और पौष्टिक आहार ही देना चाहिए।

छात्र-छात्राओं- मोहसिन, सरफराज, प्रांजल, हुजैफा, जहरा, निशांत, शिवानी, एजाज, ईशा और नितिन ने लघु नाटक के जरिए बताया, भारत जैसे देश में लोग किस तरह दवाइयों से ज्यादा अंधविश्वास पर भरोसा करते हैं। निर्णायक मंडल में कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की वाइस प्रिंसिपल डॉ. जसलीन, डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की प्राचार्या डॉ. शिवानी एम कौल, श्रीमती कंचन गुप्ता, श्रीमती अर्चना जैन, वीना पाणी और रवि कुमार रहे। संचालन नवरीत बूरा, डॉ. रूचि कांत, श्रुति सिन्हा ने किया।

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