होम राज्य उत्तर प्रदेश राष्ट्रकवि डॉ.ब्रजेन्द्र अवस्थी के 90वें जन्मदिन पर बदायूँ में हुई काव्य सन्धया

राष्ट्रकवि डॉ.ब्रजेन्द्र अवस्थी के 90वें जन्मदिन पर बदायूँ में हुई काव्य सन्धया

राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने कविता के माध्यम से अर्पित किये श्रद्धासुमन ,

हुंकार साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में हुई काव्य सन्ध्या

देर रात तक चली काव्य -सन्ध्या

हुंकार साहित्यिक संस्थान के तत्वावधान में राष्ट्रकवि डा.ब्रजेन्द्र अवस्थी के 90वें जन्मदिन पर एक काव्य सन्ध्या का आयोजन धूमधाम से किया गया जिसमें जनपद के वरेण्य कवियों ने अपने काव्य पाठ से समस्त लोगों को रस प्लावित कर दिया ।

सर्वप्रथम ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के चित्र के समक्ष बिल्सी से पधारे वरिष्ठ कवि श्री नरेन्द्र ‘गरल ‘ने दीप-प्रज्वलन किया तथा उझानी से पधारे प्रख्यात कवि श्री टिल्लन वर्मा ने माल्यार्पण करके आयोजन का शुभारम्भ किया, पश्चात सभी कविगणों ने डा.ब्रजेन्द्र अवस्थी के चित्र पर अपनी-अपनी पुष्पान्जलि समर्पित की ।
अन्तर्राष्ट्रीय कवियत्री श्रीमती सोनरूपा विशाल ने माँ सरस्वती का भावपूर्ण स्मरण किया,

पहले कवि के रूप में मोहम्मदी (खीरी) से पधारे युवा कवि श्री शुभम शुक्ला ‘उग्र ‘ ने अपने काव्य पाठ में कहा कि —

मेरी जो भावना मन में उसे कविता कहूंगा मैं । मेरे दिल में जो उमड़ी है वह शब्दों में गढूगा मैं ।
नहीं बाजार ऐसा मैं हो व्यापार शब्दों का । जो दुनिया में दिखा मुझको उसी को ही लिखूंगा मैं।
उदीयमान कवियत्री कु.प्रियांशी ‘बुलबुल ‘ने कुछ इस प्रकार कहा कि —
मन मेरा खिलखिलाता और मुस्कुराता है । मुझे आशीष अपनों का सदा आगे बङ़ाता है ।
बड़ों का हाथ माथे पर हमेशा ही रहा मेरे, यही सब है मुझे जो सुनहरे सपने दिखाता है ।
देश की विसंगतियों को रेखांकित करते हुये ओजकवि श्री अखिलेश ठाकुर ने अपनी हुंकार लगाई —
चालबाजियाँ या मक्कारी कब समझेंगे । देशद्रोहियों की गद्दारी कब समझेंगे ।
हर घटना सरकारों के सिर मङ़ने वाले, देश हेतु निज जिम्मेदारी कब समझेंगे ।
बजीरगंज से पधारे युवाकवि वी.एन मिश्रा ‘साहिल ‘ने माँ के महत्व पर अपनी पंक्तियाँ कहीं कि —
मेरे ख्वावों को हकीकत में बनाने वाली । मेरे हर गम में मेरा साथ निभाने वाली ।
तेरी ममता की छाँव में ये जहाँ सोता है, थपकियाँ देके मुझे रोज सुलाने वाली ।
नई कविता की इकलौती कवियत्री डा.शुभ्रा माहेश्वरी ने डा.अवस्थी को समर्पित पंक्तियाँ कहीं कि —
बज्र के समान वो ब्रज सा महान था । नाम था ब्रजेन्द्र और इन्द्र के समान था ।
बात का धनी था और सत्य पे अटल था । ऐसे गुरूप्रवर को शत-शत नमन है ।
बजीरगंज से आये युवा ओजस्वी कवि श्री आदित्य तोमर ने कहा कि —
दो ही अक्षरों का हो परन्तु जैसे गुरूमंत्र ,सारे बन्धनों को ही वलात काट देता है ।
अपनों के प्रेम का जो बल साथ हो तो व्यक्ति,मुश्किलों के पड़े ताले सात काट देता है ।
उझानी से पधारे वरिष्ठ डा.गीतम् सिंह ने कहा कि —
जियो जिन्दगी को अगर तुम खुशी से । नहीं कोई उम्मीद रखना किसी से ।
प्रख्यात व्यंगकार श्री मधुकर मिश्र ने कहा कि —
स्वच्छ भारत मिशन का, चला यहाँ अभियान ।फ्लेक्सी द्वारा ङक गये सारे कूड़ेदान ।
भक्ति और श्रंगार के उद्भट हस्ताक्षर वरिष्ठ कवि श्री महेश मित्र ने कहा कि —
गया वर्ष जैसा बीता है वैसा कभी न आये । नया वर्ष मानव जीवन में हर पल खुशियाँ लाये ।
मिलें परस्पर लोग सभी लेकर सदभाव ह्रदय में, हर दिन मौसम रहे सुहाना हर इंशा हर्षाये ।
अन्तर्राष्ट्रीय कवियत्री श्रीमती सोनरूपा विशाल ने अपने मनमोहक स्वर से कुछ इस तरह गुनगुनाया —
आप हस्ताक्षर करें आस्तित्व पर , क्या स्वयं को मैं तभी स्वीकृत करूँगी ।
बंजरी धरती पे यदि चलना पड़ा तो, स्वयं को जलधार बन कृत-कृत करूँगी ।
वरिष्ठ कवि चन्द्रपाल सिंह ‘सरल ‘ने शहरों की समस्याओं को रेखांकित करते हुये कहा —
आ गये मेहमान घर में क्या करें । सारी दिनचर्या अधर में क्या करें ।
गाँव होता तब तो हो जाता सरल, एक कमरा है शहर में क्या करें ।
बदायूँ क्लब के सचिव कवि डा.अक्षत अशेष ने अपने गीत ग़ज़लों से सबको मंत्र-मुग्ध कर दिया ।
हुंकार संस्थान के संयोजक कुलदीप अंगार ने गुरूप्रवर डा.अवस्थी को स्मरण करते हुये कहा कि —
रक्तवर्ण नेत्र और कर्ण भी विशाल थे । देशद्रोहियों को बने काल-विकराल थे ।
ऐसा कवि अब कहीं और नहीं दीखता, धीरता में गुरूदेव सिन्धु की मिसाल थे ।
विख्यात गीत /गज़लकार डा.अरविन्द ‘धवल ‘ने कुछ इस तरह कहा कि …..
बना आपदा को अवसर वो चैन से सोये हैं । हमने कोरोना से जंग में अपने खोये हैं ।
उझानी से पधारे प्रख्यात जनकवि श्री टिल्लन वर्मा ने अपना गरिमामयी काव्य पाठ करते कहा कि ……
मुफ़लिस बिना इलाज जहाँ से गुज़र गये । लेकिन अमीर लोग भला कैसे मर गये ।
अंत में आयोजन की अध्यक्षता कर रहे बिल्सी से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेन्द्र ‘गरल ‘जी ने सभी को सम्मोहित करते हुये अपना काव्य पाठ किया कि –
पाँचजन्य के प्रक्षालन का पर्व मनाते हैं । शब्द-युद्ध के संचालन का पर्व मनाते हैं ।
फिर दीवारों में चुन जाने की कट्टरता का, पोषण करते हैं,पालन का पर्व मनाते हैं ।
देर रात तक चली काव्य -सन्ध्या में अशोक नारंग, शिवओम शंखधार, भुवनेश माहेश्वरी, सर्वज्ञ मिश्रा, गायत्री मिश्रा, प्रथमेश मिश्रा, अशोक मलिक, मोहन, अनुराग अग्निहोत्री, निखिल मिश्रा आदि लोगों की महनीय उपस्थिति रही । काव्य सन्ध्या का सफल और गरिमामयी संचालन प्रख्यात व्यंगकार मधुकर मिश्र: ने किया तथा हुंकार साहित्यिक संस्थान के संयोजक कुलदीप अंगार ने समस्त आगन्तुक कवि और कवियत्रियों का आभार व्यक्त किया ।

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