होम राज्य उत्तर प्रदेश न पैसा काम आया न सोर्स 7 दिन में 17 लाख खर्च,...

न पैसा काम आया न सोर्स 7 दिन में 17 लाख खर्च, फिर भी नहीं बचे….डेढ़ साल के कोरोना संक्रमित बेटे ने दी मां-बाप को मुखाग्नि

स्वदेश केसरी अपने सभी पाठकों से अपील करता है देश मे कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण हालत बहुत ही भयावह हो गए हैं, हर दिन इतनी दर्द नाक घटनाएं घटित हो रहीं हैं जिनको लिखते लिखते हाथ भी कांपने लगे हैं,पूरे के पूरे परिवार उजड़ रहे हैं, किसी को अस्पताल में बैड नहीं तो किसी को ऑक्सीजन नहीं अगर दोनों भी हैं जरूरत की दवाइयां नहीं, यह सब है तो पैसा नहीं, करें तो क्या करें, वर्तमान हालात में सब वेबस नजर आ रहे हैं,क्या आम क्या खास,क्या मंत्री क्या संतरी, क्या अधिकारी कोरोना किसी को नहीं छोड़ रहा जो उसके चपेट में आ रहा उसको लपेट दे रहा है।न पैसा काम आ रहा न सोर्स, इस लिये सबसे एक ही निवेदन है अगर भगवान का दिया सब कुछ है और एक दो महीने नमक की रोटी से भी काम चल सकता हो तो सरकार को मत देखो अपने परिवार की तरफ देखो,जिंदा रहोगे तो फिर कमा लोगे, लेकिन तुम न रहे तो बच्चे क्या करेंगें, दुकान,कारोबार, ऑफिस तब तक हैं जब तक तुम हो,लोगों को अपने लोगों के कंधे नसीब नहीं हो रहे,उनका अंतिम समय मे मुँह तक देखने को नहीं मिल रहा,अब ऐसे हालात में इसको पढ़ने के बाद फैसला आपको करना है पैसा चाहिए या परिवार,

अब में जिस घटना को लिखने जा रहा हूँ उसको पढ़कर कलेजा मुँह को आ गया है फिर भी आप सभी को जगाने और चेताने के लिये इस घटना को अपने पाठकों तक पहुंचा रहा हूँ। यह घटना है गोरखपुर की ……….

हाइलाइट्स:

  • बढ़ते कोविड संक्रमण के बीच गोरखपुर से मार्मिक खबर
  • संक्रमित दंपति की मौत, डेढ़ साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
  • 7 दिन में खर्च हुए 17 लाख, लेकिन नहीं बच सकी जान

गोरखपुर :कोरोना के बढ़ते मामले के बीच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बेहद मार्मिक तस्वीर देखने को मिली। यहां एक दंपति के कोरोना संक्रमित होने के बाद लाखों रुपए खर्च हो गए। लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद माता पिता को डेढ़ वर्षीय संक्रमित बेटे ने श्मशान घाट पर मुखाग्नि दी।

7 दिनों में खर्च हो गए 17 लाख
गोरखपुर के पादरी बाजार निवासी 37 वर्षीय अजय जायसवाल और उनकी पत्नी अंशिका 35 वर्ष कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमित मिले। बाद में जांच किया गया तो उनकी 6 वर्षीय बेटी गुनगुन और डेढ़ साल का बेटा आंनद भी कोरोना पॉजिटिव था। दंपति को 70 प्रतिशत संक्रमण फैल चुका था, जिसकी वजह से उन्हें राजेंद्र नगर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ऐडमिट किया गया। वहां स्थिति में बिगड़ने लगी तो डॉक्टर्स ने रैफर कर दिया।

20 अप्रैल को छात्रसंघ चौराहे स्थित एक हॉस्पिटल में ऐडमिट कराया गया। दंपति की स्थिति लगातार बिगड़ती रही, जिसके बाद परिजन ने अमेरिका के एक बड़े अस्पताल में भी संपर्क किया। 7 दिन में 17 लाख रुपये खर्च हो गए लेकिन दंपति को नही बचाया जा सका। आखिरकार शुक्रवार को अंशिका और अजय कोरोना से जंग हार गए।

डेढ़ वर्षीय संक्रमित बेटे ने माता पिता को दी मुखाग्नि शनिवार को अंशिका और अजय की मौत की सूचना बच्चों को दी गई। इसके बाद डेढ़ वर्षीय कोरोना संक्रमित बेटे आंनद ने शनिवार को माता पिता के चिता को मुखाग्नि दी। दुधमुंहे बच्चे को मुखाग्नि देते देख घाट पर मौजूद लोगों के आंखों से आंसू छलक गए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here