
बदायूं। सनातन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को लेकर सनातन बोर्ड ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। बोर्ड ने जनपद बदायूं के प्राचीन पौराणिक नाम “वेदामऊ” को पुनः स्थापित कराने के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया है। इसी क्रम में रविवार 28 दिसंबर 2025 को अपराह्न 3:30 बजे सुभाष चौक स्थित सनातन बोर्ड कार्यालय–दलपत राय मंदिर में एक महत्वपूर्ण चिंतन बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के संरक्षक नंदकिशोर जी ने कहा कि बदायूं संतों और ऋषि-मुनियों की पवित्र तपोभूमि रही है। प्राचीन काल में यहां स्थापित गुरुकुलों में दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों छात्र आकर सनातन धर्म, वेद, उपनिषद और शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण करते थे। यह भूमि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रही है, जिसे आज पुनः जागृत करने की आवश्यकता है।
सनातन बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र कुमार साहू ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा महिपाल के शासनकाल में इस जनपद का नाम वेदामऊ था। बाद में मुगलों के आक्रमण और शासन के दौरान इस नाम का अपभ्रंश होकर वर्तमान में “बदायूं” प्रचलन में आ गया। उन्होंने कहा कि जनपद की वास्तविक पहचान उसके प्राचीन नाम से ही जुड़ी है।
बैठक में संगठन के महासचिव एडवोकेट अश्वनी भारद्वाज ने विस्तृत प्रस्ताव रखते हुए कहा कि बदायूं की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक तथ्यों को आधार बनाकर जनपद का नाम पुनः “वेदामऊ” किए जाने के लिए विधिवत अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा और जनजागरण अभियान भी शुरू किया जाएगा।
मुख्य अतिथि श्री सूर्य देव वर्मा ने कहा कि केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को जीवंत रखने के लिए क्षेत्र में नए-नए गुरुकुलों की स्थापना भी आवश्यक है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव एवं मांग पत्र भेजा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सके।
बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता, एडवोकेट दिनेश चंद्र वर्मा, चंद्र देव वर्मा, आकाश साहू, आकाश प्रजापति, राजकुमार सेनगर, यशवर्धन सक्सेना, एडवोकेट राजीव रायजादे, नरेंद्र गुप्ता, राकेश साहू, डॉ. अमर सिंह, शेखर साहू सहित अनेक पदाधिकारी और सनातन विचारधारा से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जनपद के प्राचीन गौरव, संस्कृति और पहचान को पुनः स्थापित करने के लिए संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से अभियान चलाया जाएगा तथा “वेदामऊ” नाम को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।


























