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बिल्सी मे चल रही रामलीला महोत्सव में भगवान राम का किरदार निभा रहे मुरारी लाल जी असल जिंदगी मे भी बचाते हैं लोगों की ज़िन्दगीयाँ-दिल्ली क़े अपोलो हॉस्पिटल मे हैं चीफ नर्सिंग स्टाफ, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम

बिल्सी। नगर की ऐतिहासिक गौशाला रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव इस वर्ष कई मायनों में विशेष है। जहां एक ओर वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार दशहरे के बाद रावण दहन और भरत मिलाप का भव्य आयोजन किया गया, वहीं इस बार दर्शकों का ध्यान खींचने वाला केंद्र बने — मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का किरदार निभा रहे 26 वर्षीय मुरारी लाल, जिनकी कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही अद्भुत भी।

मुरारी लाल हरियाणा के फरीदाबाद नगर के मूल निवासी हैं और पिछले 10 वर्षों से श्रीधाम वृंदावन की सुप्रसिद्ध श्री बृजराज राजेश्वरी लीला संस्थान से जुड़े हुए हैं। इस संस्थान के संस्थापक स्वामी सुरेश कुमार बृजवासी ने स्वदेश केसरी न्यूज़ से विशेष बातचीत में बताया कि “मुरारी लाल न केवल भगवान श्रीराम का स्वरूप बड़ी भक्ति और मर्यादा के साथ निभाते हैं, बल्कि वे रामायण के प्रत्येक भाव को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। उनमें वह संयम, सरलता और शालीनता है, जो वास्तव में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पहचान है।”

स्वामी बृजवासी ने बताया कि बिल्सी जैसे छोटे कस्बे में इस स्तर की धार्मिक प्रस्तुति में मुरारी लाल का अभिनय एक नई चेतना लेकर आया है। उन्होंने कहा, “राम के स्वरूप में जब वे मंच पर आते हैं, तो वातावरण एक पल में आध्यात्मिकता से भर उठता है। उनके संवाद, नेत्रों की भावभंगिमा और शुद्ध उच्चारण दर्शकों को सीधे त्रेतायुग की झलक दे देते हैं।”

मुरारी लाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अग्रवाल कॉलेज, फरीदाबाद से पूरी की। उन्होंने इसके बाद बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई की और वर्तमान में इंद्रप्रस्थ, दिल्ली स्थित अपोलो हॉस्पिटल में चीफ नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं। पेशे से एक कुशल स्वास्थ्यकर्मी होने के साथ-साथ वे भक्ति भाव से ओतप्रोत कलाकार भी हैं।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्हें “बेस्ट टीम लीडर” के पुरस्कार से दो बार सम्मानित किया जा चुका है। अपनी व्यस्त नर्सिंग सेवा के बीच भी वे हर वर्ष कुछ समय भक्ति और रामलीला मंचन के लिए अवश्य निकालते हैं।

एक विशेष बातचीत में स्वयं मुरारी लाल ने कहा,

“मेरे लिए भगवान श्रीराम का अभिनय करना केवल एक भूमिका नहीं, बल्कि साधना है। जब मैं राम के रूप में मंच पर खड़ा होता हूं, तो लगता है जैसे मेरा अस्तित्व वहीं समाप्त होकर प्रभु में विलीन हो गया हो। सेवा का भाव ही मेरे जीवन का मूल मंत्र है — चाहे अस्पताल में मरीजों की सेवा हो या मंच पर श्रीराम का चरित्र निभाना, दोनों का उद्देश्य मनुष्य में करुणा, प्रेम और धर्म का संचार करना है।”

उन्होंने बताया कि उनका सपना है कि युवाओं में धर्म, मर्यादा और सेवा भावना का प्रसार हो। उनका मानना है कि “यदि आज के युवा श्रीराम के आदर्शों को अपनाएं, तो समाज में शांति और सम्मान अपने आप लौट आएंगे।” इस रामलीला महोत्सव मे मुरारी लाल जी के राम क़े स्वरूप क़े अभिनय ने दर्शकों के हृदय में अमिट छाप छोड़ी है।

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