

बदायूं। जिले की पुलिस पर एक बार फिर पशुओं के प्रति असंवेदनशीलता का गंभीर आरोप लगा है। थाना हज़रतपुर क्षेत्र के ग्राम अभयपुर निवासी पिंटू सिंह ने तहरीर देकर बताया कि बीते 9 सितंबर को उसके पालतू कुत्ते पर गांव के ही हरीओम पुत्र राजेंद्र सिंह ने डंडे से बर्बर हमला कर उसकी कमर तोड़ दी। पीड़ित जब न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंचा तो वहां मौजूद दरोगा ने अमानवीय जवाब देते हुए कहा—
“हम यहां कुत्तों के लिए नहीं बैठे हैं, अगर तुम्हें चोट लगी हो तो बताओ। कुत्ते का इलाज खुद कराओ।”
पीड़ित की शिकायत न दर्ज करना और इस तरह का जवाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
SSP की चुप्पी से बढ़ रही हिम्मत
जिले भर में चर्चा है कि जिले के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लगातार ऐसे मामलों पर चुप्पी साधे रहते हैं। यही कारण है कि अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के हौसले बुलंद हैं और वे पशुओं के खिलाफ हो रही क्रूरता को नज़रअंदाज कर रहे हैं। सवाल यह है कि अगर किसी एक दोषी पुलिसकर्मी पर सख्त कार्रवाई हो जाए तो पूरे जिले में संदेश जाएगा कि कानून तोड़ने वालों पर चाहे वे इंसान हों या पशु पर अत्याचार करने वाले—कार्यवाही अनिवार्य है।
पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले थाना बिनावर पुलिस भी पशु क्रूरता के मामले में विवादित बयान देकर सुर्खियों में आई थी। पशु प्रेमी वीकेन्द्र शर्मा ने थाना प्रभारी को सूचना दी थी कि थाने के पास लगने वाली पशु बाजार में व्यापारी जानवरों को ठूंस-ठूंसकर गाड़ियों में भर रहे हैं। तब थानाध्यक्ष ने जवाब दिया था—
“आप पशुप्रेमी हैं, आप उनसे प्रेम करिए। हम पुलिस सिर्फ मनुष्यों पर होने वाली क्रूरता के लिए बने हैं।”
उस समय मामला CO सिटी स्तर पर जांच में तो गया, लेकिन रफा-दफा कर दिया गया। अगर उस वक्त सख्त कार्रवाई होती तो शायद आज हज़रतपुर पुलिस इतनी असंवेदनशीलता से जवाब देने की हिम्मत न करती।
इंसानियत और पुलिस की भूमिका पर सवाल
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पशुओं पर हो रही क्रूरता भी कानूनन अपराध है। पुलिस का यह कहना कि वह केवल मनुष्यों के लिए बनी है, न केवल कानून की धज्जियां उड़ाना है बल्कि इंसानियत पर भी चोट है। ऐसे पुलिसकर्मियों की दोबारा काउंसलिंग/ट्रेनिंग कराई जानी चाहिए या फिर इनकी सेवाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम पुलिस को इतनी कार्रवाई तो करनी चाहिए थी कि आरोपी को सज़ा के रूप में घायल कुत्ते का पूरा इलाज कराने का आदेश देती। लेकिन पुलिस का हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाना न केवल आरोपियों की हिम्मत बढ़ाता है, बल्कि ऐसे मामलों की संख्या में भी इज़ाफ़ा करता है।
पीड़ित की गुहार
पीड़ित पिंटू सिंह ने SSP से गुहार लगाई है कि आरोपी हरीओम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही थाने पर बैठे ऐसे असंवेदनशील पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्यवाही हो ताकि भविष्य में किसी और पीड़ित को ऐसी बेइंसाफ़ी न झेलनी पड़े।














