बदायूं, 25 अप्रैल — जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल एवं एक व्यापार मंडल ने बदायूं में बंद का आह्वान किया था, लेकिन इसका असर बेहद सीमित नजर आया। शहर का लगभग 99 प्रतिशत बाजार सुबह से ही सामान्य रूप से खुला रहा।

हालांकि विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया और शास्त्री चौक व परशुराम चौक पर आक्रोश प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान का पुतला दहन भी किया, लेकिन व्यापारियों ने इस आह्वान को खास तवज्जो नहीं दी। जैसे ही कार्यकर्ता किसी दुकान पर पहुंचे और बंद की अपील की, दुकानदार उनके सामने शटर गिराकर किनारे हो गए, पर कार्यकर्ताओं के जाते ही दोबारा दुकानें खोल दी गईं।

शहर के प्रमुख बाजार जैसे टिकटगंज, सुभाष चौक, सर्राफा बाजार, छह सड़का मार्केट, बाबूराम मार्केट, रोडवेज, लावेला चौक, हलवाई चौक, पुराना बाजार, चुना मंडी, नेहरू चौक, खैराती चौक, गोपी चौक, इंदिरा चौक, सिविल लाइन, आवास विकास और मढ़ई चौक में अधिकतर दुकानें खुली दिखाई दीं।

किराना, मिठाई और आवश्यक वस्तुओं की दुकानें तो सुबह से ही रोज की तरह सामान्य रूप से खुली थीं। विहिप ने व्यापारी वर्ग की प्रवृत्ति को देखते हुए दोपहर तक ही बंद की अपील की थी, परंतु यहां तक कि कई भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों की दुकानें भी सुबह से ही खुली दिखाई दीं—जबकि वही नेता एक रात पहले मोमबत्ती जलाकर शोक व्यक्त कर रहे थे।

विहिप की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:
मंगलवार को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाकर गोलाबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के विरोध में विहिप और बजरंग दल ने शुक्रवार को बंद का आह्वान करते हुए शास्त्री चौक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की और परशुराम चौक पर पाकिस्तान का पुतला दहन कर आक्रोश प्रकट किया।

जिला मंत्री एडवोकेट उज्ज्वल गुप्ता ने कहा, “देश की 140 करोड़ जनता मोदी जी के साथ है। जैसे मोदी जी ने पाकिस्तान से पानी छीना, अब पाकिस्तानी नागरिकों की सांसें भी छीन लेनी चाहिए।” इस दौरान कार्यकर्ता “पाकिस्तान मुर्दाबाद”, “हिंदुस्तान जिंदाबाद” जैसे गगनभेदी नारे लगा रहे थे।

प्रदर्शन में प्रमुख रूप से नीरज रस्तोगी, उज्ज्वल गुप्ता, हरिओम पाठक, अरविंद शर्मा, देवकीनंदन शर्मा, महेंद्र पाल सिंह, नीरज कोचर, ऋषि वर्मा, जितेंद्र गुप्ता, मयूर गुप्ता, राजीव साहू, रचना शंखधर, राजीव जौहरी, मणि भदौरिया, शुभम रस्तोगी, साहनी, प्रशांत रस्तोगी, वेंकटेश भारद्वाज, सूर्य, उत्कर्ष मिश्रा, लक्ष्य गुप्ता और सुग्रीव समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे।

निष्कर्ष:
बदायूं में बंद का आह्वान पूरी तरह सफल नहीं रहा। हालांकि आक्रोश प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं का उत्साह दिखा, लेकिन आम व्यापारियों ने रोजमर्रा की जरूरतों और आदतों को प्राथमिकता दी। इस वजह से बंद आह्वान को आंशिक सफलता ही मिल सकी। सबसे बड़ी बात इस बंद के आवाहन की यह रही शहर की अधिकांश से समय भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के फ्रंटल संगठनों से जुड़े लोगों की दुकानें हैं उसके बावजूद भी उन लोगों का इस बंद में रुचि नहीं दिखाना अपने आप में सवाल खडे कर गया ?

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