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बदायूं ठेकेदार संघ ने उठाई समस्याओं की आवाज़, लंबित भुगतान और नियमों में बदलाव की मांग

बदायूं: ठेकेदारों की समस्याओं के निराकरण के लिए बदायूं के ठेकेदारों ने दो दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया। “कांट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन” के जिलाध्यक्ष बलवीर सिंह और महासचिव देवेंद्र सिंह (बब्लू) के नेतृत्व में ठेकेदारों ने अपनी मांगें रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से तुरंत समाधान की मांग की है। ठेकेदारों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग, बदायूं में उनके लगभग 8.5 करोड़ रुपये का भुगतान 2 साल से अधिक समय से लंबित है, जबकि विभाग द्वारा वर्ष 2022 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को बिटुमिन में एडवांस भुगतान किया गया था।

ठेकेदारों की प्रमुख समस्याएं:

  1. बकाया भुगतान और ब्याज: ठेकेदारों की जमा की गई जमानत राशि और बिटुमिन मद की राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग उठाई गई है। ठेकेदार संघ ने यह भी मांग की है कि यदि भुगतान में देरी होती है, तो उसमें 18 प्रतिशत जीएसटी और ब्याज भी जोड़ा जाए।
  2. रॉयल्टी पर छूट: ठेकेदारों ने रॉयल्टी शुल्क और 6 गुना दंड का विरोध किया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि ठेकेदारों पर रॉयल्टी का भार न डाला जाए, क्योंकि ठेकेदार खुद खनन कार्य नहीं करते हैं।
  3. अनुरक्षण की नई व्यवस्था: ठेकेदार संघ ने 5 वर्षीय अनुरक्षण की व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनके अनुसार, ग्रामीण सड़कों पर बढ़ते यातायात और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को देखते हुए अनुरक्षण का उचित प्रावधान जरूरी है। संघ ने इसे 2 वर्षीय प्रक्रिया के रूप में लागू करने की सिफारिश की है।
  4. निविदाओं के नियमों में बदलाव: ठेकेदार संघ का कहना है कि निविदाओं में दरें और जमानत राशि वित्तीय हस्तपुस्तिका – 5 के अनुसार ली जाए। इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया को शुरू करने से पहले तकनीकी स्वीकृति (टीएस) सुनिश्चित की जाए, ताकि ठेकेदारों का शोषण न हो।
  5. एसओपी का अभाव: ठेकेदारों का कहना है कि बिना मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं, जिससे ठेकेदार भ्रमित हो रहे हैं।

शासन को ज्ञापन

ठेकेदार संघ ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी मांगें पहुंचाते हुए कहा है कि उनके शोषण को रोका जाए और बकाया भुगतान का तत्काल निस्तारण किया जाए। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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