सभासद एवं अधिवक्ता अजीत सिंह गुर्जर एवं सभासद उमेश वार्ष्णेय की शिकायत के बाद राजस्व टीम ने की जांच, अवैध कब्जे की पुष्टि पर बेदखली की कार्रवाई शुरू
बिल्सी। नगर में नवनिर्मित रोडवेज बस स्टैंड के निकट स्थित सरकारी भूमि पर लंबे समय से किए जा रहे कथित अवैध कब्जे के मामले में तहसील प्रशासन ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। शिकायत और राजस्व विभाग की जांच के बाद 18 लोगों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया है।
इस मामले को प्रमुखता से उठाने वाले नगर पालिका परिषद के सभासद एवं अधिवक्ता अजीत सिंह गुर्जर तथा सभासद उमेश बाबू ने सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) के साथ-साथ जिलाधिकारी को भी शिकायती पत्र दिया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि बिल्सी में श्रेणी-3 की सरकारी भूमि पर कुछ लोगों ने लंबे समय से मकान और दुकानें बनाकर कब्जा कर रखा है।
सभासद अजीत गुर्जर ने उठाया सरकारी जमीन का मुद्दा
सभासद एवं अधिवक्ता अजीत सिंह गुर्जर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकारी भूमि की स्थिति की जांच कराकर उसे कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि सार्वजनिक एवं सरकारी उपयोग के लिए दर्ज भूमि पर यदि लंबे समय तक निजी लोगों का कब्जा बना रहता है तो इससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान होता है, बल्कि भविष्य में भूमि के उपयोग को लेकर भी विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
अजीत गुर्जर और सभासद उमेश बाबू की ओर से 21 अप्रैल 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा जिलाधिकारी को भी शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच एवं कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रोडवेज बस स्टैंड के आसपास स्थित श्रेणी-3 की सरकारी भूमि के कुछ हिस्सों पर लोगों ने मकान और दुकानें बनाकर कब्जा कर रखा है। शिकायतकर्ताओं ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति स्पष्ट कराने तथा यदि कब्जा अवैध पाया जाए तो नियमानुसार उसे हटाने की मांग की थी।
एसडीएम के निर्देश पर राजस्व टीम ने की मौके पर जांच
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की स्थिति की जांच की। टीम ने मौके पर मौजूद निर्माण एवं कब्जे की स्थिति का निरीक्षण करने के साथ संबंधित राजस्व अभिलेखों की भी जांच की।
जांच के दौरान सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।
राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर उप जिलाधिकारी ने 4 मई 2026 को तहसीलदार को बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
18 लोगों के खिलाफ धारा 67 में दायर हुआ वाद
प्रशासनिक स्तर पर जांच और निर्देश के बाद अब इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय में धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया है।
धारा 67 के तहत सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामलों में संबंधित पक्षों के विरुद्ध राजस्व न्यायालय में कार्रवाई की जाती है। अब मामले में संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
इस कार्रवाई के बाद नगर में सरकारी भूमि पर कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
शिकायतकर्ताओं ने कहा—सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए
सभासद एवं अधिवक्ता अजीत सिंह गुर्जर का कहना है कि शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि यदि राजस्व अभिलेखों में भूमि सरकारी दर्ज है और जांच में उस पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन सार्वजनिक संपत्ति होती है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई होने से भविष्य में अवैध कब्जों को बढ़ावा मिलने से रोका जा सकता है।
सभासद उमेश बाबू ने भी सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। दोनों सभासदों की शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा जांच कराए जाने और अब 18 लोगों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किए जाने को मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
प्रशासन बोला—नियमों के अनुसार होगी कार्रवाई
उप जिलाधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों के संबंध में राजस्व विभाग द्वारा जांच की गई थी। जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 18 लोगों के विरुद्ध तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया गया है।
उन्होंने बताया कि अब मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
बस स्टैंड के आसपास सरकारी जमीन की स्थिति पर भी उठे सवाल
नवनिर्मित रोडवेज बस स्टैंड के निकट सरकारी भूमि से जुड़ा मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर सरकारी जमीन पर लंबे समय तक निर्माण और कब्जा किस तरह बना रहा।
यदि राजस्व अभिलेखों में भूमि सरकारी दर्ज है तो उसकी नियमित निगरानी और सीमांकन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का विषय है। प्रशासन द्वारा अब मामले में न्यायालयी कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि सुनवाई के बाद सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने को लेकर क्या निर्णय होता है।
फिलहाल सभासद एवं अधिवक्ता अजीत सिंह गुर्जर और सभासद उमेश बाबू की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई 18 लोगों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर होने तक पहुंच गई है। अब आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय और राजस्व विभाग की प्रक्रिया के आधार पर होगी।

























