• बेजुबान की पीड़ा देख रुकी पुलिस जीप, निभाया इंसानियत और वर्दी का फर्ज,
  • नहीं मिली सरकारी मदद पुलिस और पशु प्रेमियों ने मिलकर ही बचाया गौवंश

बदायूं। अक्सर पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हुए देखा जाता है, लेकिन कभी-कभी वर्दी के पीछे छिपी संवेदनशील इंसानियत ऐसे उदाहरण पेश कर देती है, जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसा ही एक सराहनीय मामला बदायूं के खेड़ा नवादा पुलिस चौकी क्षेत्र में सामने आया, जहां देर रात गश्त के दौरान एक घायल बछड़े की जान बचाने के लिए पुलिस और पशु प्रेमियों ने मिलकर मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की।

जानकारी के अनुसार थाना सिविल लाइन क्षेत्र की खेड़ा नवादा चौकी पर तैनात उपनिरीक्षक योगराज अपनी पुलिस टीम के साथ रात्रि लगभग 12 बजे गश्त पर थे। इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े एक बछड़े पर पड़ी। अधिकांश लोग ऐसी स्थिति में अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन उपनिरीक्षक योगराज ने इंसानियत और अपने सामाजिक दायित्व का परिचय देते हुए तुरंत वाहन रुकवाया और बछड़े की मदद के प्रयास शुरू कर दिए।

बताया जाता है कि पुलिस टीम ने तत्काल सरकारी सेवारत पशु चिकित्सक से संपर्क कर उपचार की व्यवस्था कराने का प्रयास किया, लेकिन देर रात होने के कारण कोई तत्काल समाधान नहीं मिल सका। इसके बाद उपनिरीक्षक योगराज ने पशु संरक्षण के लिए दिन रात 24 घंटे सक्रिय पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा से संपर्क किया और पूरी स्थिति से अवगत कराया।

सूचना मिलते ही पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने भी संवेदनशीलता का परिचय दिया। रात का समय होने के बावजूद उन्होंने अपनी टीम के सदस्य वीरेश यादव और रवि माथुर के साथ मौके पर पहुंचकर घायल बछड़े का रेस्क्यू किया और उसे सुरक्षित रूप से अपने संरक्षण केंद्र (शेल्टर) पहुंचाया, जहां उसके उपचार और देखभाल की व्यवस्था की गई।

पशु प्रेमियों ने उपनिरीक्षक योगराज और उनकी पूरी पुलिस टीम की सराहना करते हुए कहा कि यदि पुलिस समय रहते इस बेजुबान जीव की ओर ध्यान न देती तो उसकी जान भी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनना केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज और सभी जीवों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना भी है। उपनिरीक्षक योगराज और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा साथ-साथ चल सकती हैं।

पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने पुलिस टीम का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में जब अधिकांश लोग घायल पशुओं को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं, तब पुलिस का इस तरह रुककर मदद करना बेहद सराहनीय है। उन्होंने कहा कि बदायूं पुलिस की यह पहल समाज को सकारात्मक संदेश देती है।

हालांकि इस घटना ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा किया है। गौवंश और अन्य घायल पशुओं के लिए देर रात सरकारी स्तर पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध न होना चिंता का विषय है। सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब रात के समय कोई गौवंश घायल हो जाता है तो उसकी सहायता के लिए कोई प्रभावी सरकारी व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं देती। ऐसे में कई बार पशुओं की जान केवल इसलिए चली जाती है क्योंकि उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को रात्रिकालीन पशु चिकित्सा सहायता और आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए, ताकि किसी भी घायल पशु को समय पर उपचार मिल सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील पुलिसकर्मी, जागरूक नागरिक और पशु प्रेमी मिलकर किसी भी बेजुबान की जिंदगी बचा सकते हैं। उपनिरीक्षक योगराज, उनकी पुलिस टीम तथा पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा और उनके सहयोगियों की यह पहल निश्चित रूप से मानवता और पशु प्रेम की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

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