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बदायूं में संवेदनहीनता की इंतहा: सोशल मीडिया पर बनते रहे वीडियो, 40 फीट ऊंची टंकी से गिरकर सांड की दर्दनाक मौत

बदायूं। जनपद के मूसाझाग थाना क्षेत्र के ग्राम किसरुआ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बेजुबान सांड निर्माणाधीन पानी की टंकी पर चढ़ गया, लेकिन उसे सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश करने के बजाय लोग घंटों तमाशबीन बने रहे। कोई वीडियो बनाता रहा तो कोई सोशल मीडिया पर मजाकिया पोस्ट और मीम्स साझा करता रहा। आखिरकार नीचे उतरने की कोशिश में सांड लगभग 40 फीट ऊंचाई से गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा रही कि यदि समय रहते प्रशासन, पुलिस या पशुपालन विभाग को सूचना दे दी जाती तो शायद बेजुबान की जान बचाई जा सकती थी। बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन पानी की टंकी की सीढ़ियों के किनारे सुरक्षा रेलिंग और दीवार नहीं थी। ऐसे में सांड जब खुद नीचे उतरने लगा तो उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे आ गिरा।

घंटों बनते रहे वीडियो, मदद को आगे नहीं आया कोई

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांड काफी देर तक टंकी के ऊपर फंसा रहा। गांव और आसपास के लोग मौके पर जुट गए, लेकिन अधिकतर लोग मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। सोशल मीडिया पर “सांड निरीक्षण करने पहुंचा” जैसे मीम्स और टिप्पणियां वायरल होती रहीं, मगर किसी ने गंभीरता से रेस्क्यू की पहल नहीं की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यूपी-112, नगर प्रशासन या पशु चिकित्सकों को तुरंत बुला लिया जाता तो क्रेन या अन्य संसाधनों की मदद से सांड को सुरक्षित नीचे उतारा जा सकता था।

घटना ने खड़े किए कई सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और सोशल मीडिया की दिखावटी मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग मदद करने से ज्यादा वायरल वीडियो बनाने में रुचि दिखा रहे हैं। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने कहा कि यह केवल एक पशु की मौत नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के कमजोर पड़ने का भी उदाहरण है।

ग्रामीणों में रोष, जिम्मेदारों पर उठे सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माणाधीन टंकी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि ऊंची संरचनाओं पर सुरक्षा रेलिंग और घेराबंदी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

ग्रामीणों और सामाजिक लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में तत्काल रेस्क्यू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और लोगों को भी जागरूक किया जाए कि संकट में फंसे किसी भी जीव की मदद करना सामाजिक जिम्मेदारी है, न कि उसका तमाशा बनाना।

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