




















बदायूं। बदायूं में आचमन फाउंडेशन द्वारा आयोजित पंचम ‘आचमन कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह’ काव्य की अविरल धारा के बीच देर रात तक चलता रहा। इस आयोजन में देश के नामचीन कवियों के साथ-साथ गांव-कस्बों की छिपी प्रतिभाओं को भी मंच देकर आचमन ने अपनी विशिष्ट पहचान को और सशक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन वरिष्ठ कवि डॉ. शिव ओम अंबर, नगर विधायक महेश चंद्र गुप्ता, दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हृदयेश कठेरिया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक विशाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दौरान संस्थापक डॉ. सोनरूपा विशाल एवं सह-संस्थापक विशाल रस्तोगी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
‘आचमन’-केवल नाम ही नहीं, एक पावन भावना
‘आचमन’ शब्द भारतीय परंपरा में शुद्धि, पवित्रता और आत्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। जैसे पूजा से पहले आचमन कर मन और आत्मा को निर्मल किया जाता है, उसी प्रकार यह मंच भी साहित्य के माध्यम से विचारों, भावनाओं और अभिव्यक्ति को पवित्रता और ऊंचाई प्रदान करता है।
यह संस्था केवल एक मंच नहीं, बल्कि एक ऐसा पावन प्रयास है जो साहित्य की गरिमा को बनाए रखते हुए हर स्तर की प्रतिभा को समान अवसर देता है।
नामचीन के साथ गुमनाम प्रतिभाओं को भी मिलता है सम्मान
आचमन फाउंडेशन आज ऐसा मंच बन चुका है, जहां बड़े-बड़े स्थापित कवियों के साथ-साथ गांव-कस्बों में छिपी प्रतिभाओं—ग़ज़लकार, गीतकार, शायर और नवोदित कवियों—को भी राष्ट्रीय पहचान मिलती है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जो इसे अन्य आयोजनों से अलग बनाती है।
कवियों की प्रस्तुतियों ने बांधा समा
देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया—
स्वयं श्रीवास्तव
“मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते,
और घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते।”
डॉ. नदीम शाद
“ज़रा सा सब्र था जो कर गए हम,
उसे लगने लगा था मर गए हम।”
डॉ. मालविका हरिओम
“तमाम उम्र मंज़िलों की फ़िक्र में गुज़री,
वहाँ पहुँच के लगा रास्ते ही बेहतर थे।”
मोहित शौर्य
“ज़िंदगी जीने के जुनून तक जाएगा,
यह गाँव का रास्ता है सुकून तक जाएगा।”
सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’
“जब समाज में मर्यादा के वस्त्र उतारे जाएंगे,
वे भविष्य की चर्चाओं में बस दुत्कारे जाएंगे।”
कुमार आशीष
“ज़ख़्म दुनिया ने हमको दिये उम्र भर,
और हम उम्र भर मुस्कुराते रहे।”
आयुषि राखेचा
“बदन के खोल में सदियों से बंद मैं ही हूँ,
उदास लोगों की पहली पसंद मैं ही हूँ।”
रश्मि शर्मा
“भावना की इस नदी को मैं क्षणिक विश्राम लिख दूँ,
उर्मियाँ व्याकुल हृदय की लो तुम्हारे नाम लिख दूँ।”
रामायण धर द्विवेदी
“दर्द को दान में नहीं लेती,
नींद आती है बार-बार मगर आँख संज्ञान में नहीं लेती।”
अंत में डॉ. शिव ओम अंबर की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को ऊंचाई प्रदान की—
“चंद आंसू चंद आहें और कुछ ग़ज़लें,
ये हमारी जिंदगी भर की कमाई है।”
पुस्तक प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें जनपद के साहित्यकारों की कृतियों को स्थान दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनरूपा विशाल ने किया, जबकि सम्मान सत्र का संचालन डॉ. अक्षत अशेष द्वारा किया गया। बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने अंत तक कार्यक्रम का आनंद लिया।


























