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कुंवरगांव में इंसानियत शर्मसार: 7 दिन से ताले मे बंद भूख-प्यास से तड़पकर गाय की मौत, पुलिस ने ताले तोड़कर निकाले तीन जीवित पशु अधमरी हालत मे मिले, पड़ोसियों की खामोशी बनी सवाल, एक महीने में दूसरी घटना, मानवता पर उठे गंभीर सवाल

कुंवरगांव/बदायूं। थाना कुंवरगांव क्षेत्र के ग्राम बावट से एक बेहद हृदय विदारक और इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। यहां एक पशुपालक अपने पशुओं को घर में बांधकर करीब 7 दिन पहले कहीं चला गया, लेकिन इस दौरान उन बेजुबान जानवरों की सुध लेने वाला कोई नहीं मिला।

बताया जा रहा है कि घर के अंदर खूटे से बंधी एक गाय भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ गई, जबकि कमरे में बंद एक भैंस और उसके दो बच्चे बेहद कमजोर और मरने की हालत में पाए गए। हैरानी की बात यह रही कि आसपास के पड़ोसी इस स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद हिम्मत नहीं जुटा सके कि उन बेजुबानों की मदद कर सकें।

आज सुबह जब मामले की सूचना पशु प्रेमी तक पहुंची तो पीपुल्स फॉर एनिमल (पीएफए) संगठन के अध्यक्ष विक्रेन्द्र शर्मा ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव वालों की मदद से घर का ताला तुड़वाकर अंदर फंसे जीवित पशुओं को बाहर निकलवाया। मृत गाय का पोस्टमार्टम भी कराया गया है, जबकि अन्य पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है।

इस घटना ने समाज के संवेदनहीन होते चेहरे को उजागर कर दिया है। पशु प्रेमियों का कहना है कि मामला दर्ज कराना एक औपचारिकता हो सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे लोगों के अंदर मानवता और करुणा जागेगी? अगर पड़ोसी समय रहते पहल करते, तो शायद एक बेजुबान की जान बचाई जा सकती थी।

गौरतलब है कि इससे पहले सैजनी (दातागंज) गांव में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहां एक गाय बंद घर में भूख-प्यास से दम तोड़ बैठी थी। एक महीने के भीतर जनपद बदायूं मे इस तरह की दूसरी घटना ने इंसानियत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाज के हर वर्ग को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है कि बेजुबान जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची इंसानियत है।

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