बिल्सी। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में तेजी और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से बाजार में दवाओं के दाम अचानक बढ़ने लगे हैं। इससे खासकर लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, दवा बनाने में उपयोग होने वाले कई जरूरी कच्चे पदार्थ विदेशों से आयात किए जाते हैं। युद्ध की स्थिति के कारण इनकी सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और इसका सीधा असर दवाओं की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
बिल्सी के दवा विक्रेता मीनू शर्मा ने बताया कि कच्चे माल और परिवहन की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो बाजार में दवाओं के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा, जिन्हें नियमित रूप से दवाएं लेनी होती हैं।
दवाओं की कीमतों में हो रही इस बढ़ोतरी से आम लोगों में चिंता बढ़ रही है। मरीजों का कहना है कि अगर इसी तरह दाम बढ़ते रहे तो उनके लिए नियमित इलाज कराना मुश्किल हो सकता है।


























