बिल्सी। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया नवनिर्मित रोडवेज बस स्टेशन उद्घाटन से पहले ही बदहाली का शिकार हो गया है। हालात ऐसे हैं कि जनता के बीच यह बस स्टेशन अब सफेद हाथी बनकर खड़ा नजर आ रहा है और इसके निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता व भ्रष्टाचार की आशंका गहराने लगी है।

बस स्टेशन परिसर में लगाए गए तीन विद्युत पोल को मजबूत रखने के लिए बनाई गई संरचनाएं (फाउंडेशन) टूट चुकी हैं।जिनके कारण विद्युत पोल गिर गए यह स्थिति तब है जब बस स्टेशन का विधिवत उद्घाटन अभी तक हुआ ही नहीं है।

गौरतलब है कि लगभग 8 माह पूर्व नवनिर्मित बस स्टेशन का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया था, लेकिन आज तक उद्घाटन नहीं हो सका। इस बस स्टेशन का निर्माण कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा कराया गया था, जिस पर 2 करोड़ 25 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि खर्च की गई।

उद्घाटन से पूर्व ही विद्युत पोल का गिरना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या कार्यदाई संस्था के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब उद्घाटन से पहले ही यह हाल है, तो उद्घाटन के बाद यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। लोगों का आरोप है कि जिन इंजीनियरों की देखरेख में यह कार्य हुआ और जिस विभाग ने कार्य कराया, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि निर्माण के दौरान लगाए गए तीन विद्युत पोल कमजोर फाउंडेशन के चलते तीन माह पूर्व ही उखड़कर गिर चुके थे। इसके बावजूद न तो किसी प्रकार की जांच हुई और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।

बस स्टेशन पर विद्युत आपूर्ति के लिए सोलर पैनल भी लगाए गए हैं और दो माह पूर्व स्टेशन का हस्तांतरण रोडवेज विभाग को किया जा चुका है, लेकिन उद्घाटन न होने के कारण इमारत आज भी वीरान खड़ी है। वर्तमान में अस्थाई तौर पर बस स्टेशन के सामने सड़क से गुजरने वाली बदायूं–दिल्ली रूट की बसों की एंट्री कराई जा रही है।

बताया जा रहा है कि बिल्सी से प्रातः चलने वाली चार रोडवेज बसें स्टेशन परिसर में खड़ी होती हैं। बस स्टेशन की देखरेख के लिए फिलहाल तीन संविदा कर्मी तैनात किए गए हैं। जबकि एक कर्मचारी विभाग का स्थायी कर्मचारी जो सुबह 6 बजे आता ओर दोपहर 2 बजे वापिस चला जाता है, वर्तमान समय में बिल्सी होकर दिल्ली के लिए रोहिलखंड की चार, बदायूं डिपो की 13 तथा साहिबाबाद डिपो की दो बसें संचालित हो रही हैं।

सबसे अहम सवाल यह है कि जब यह मामला सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चा में है, तो इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की बात क्यों नहीं की जा रही? जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से जनता के मन में संदेह गहराता जा रहा है और कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या शासन–प्रशासन इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या फिर करोड़ों की यह परियोजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह जाएगी।

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