बदायूं। जनपद बदायूं के विकास खंड अंबियापुर अंतर्गत ग्राम सतेती में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्राम निवासी अजीत सिंह गौर ने जिलाधिकारी बदायूं को प्रार्थना पत्र देकर पूर्व सरकारी राशन डीलर उमेश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, आपराधिक कार्रवाई और सरकारी राशन की रिकवरी की मांग की है।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम सतेती, ग्राम पंचायत इन्छा, तहसील बिल्सी के पूर्व राशन डीलर उमेश शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान सुनियोजित तरीके से घटतौली, रिश्वतखोरी और सरकारी राशन के गबन को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार यह पूरा कृत्य लंबे समय तक चलता रहा, जिससे सैकड़ों गरीब और पात्र लाभार्थियों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित किया गया।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में रिश्वत और घटतौली की स्वीकारोक्ति का दावा
शिकायत में दावा किया गया है कि ग्रामीणों के पास उपलब्ध ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग में उमेश शर्मा और उनके पुत्र नवनीत शर्मा स्वयं यह स्वीकार करते हुए सुने जा सकते हैं कि संबंधित सप्लाई इंस्पेक्टर को नियमित रूप से रिश्वत दी जाती थी, और उसी की भरपाई के लिए लाभार्थियों को जानबूझकर कम राशन दिया जाता था।ऑडियो में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि प्रत्येक राशन कार्ड पर औसतन 5 से 6 किलोग्राम तक राशन कम वितरित किया गया।
प्रधान पद के प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख है कि उमेश शर्मा की पत्नी वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। आरोप है कि इस पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर ग्रामीणों को डराया गया और शिकायत करने से रोका गया, जिससे यह भ्रष्टाचार लंबे समय तक दबा रहा। शिकायतकर्ता ने इसे कोटेदार पद और ग्राम प्रधान पद का गंभीर दुरुपयोग बताया है।
विभागीय मिलीभगत की आशंका
सप्लाई इंस्पेक्टर को रिश्वत देने की कथित स्वीकारोक्ति के बाद भी संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई न होना, विभागीय संरक्षण और मिलीभगत की आशंका को और गहरा करता है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
लाइसेंस निरस्तीकरण को बताया अपर्याप्त
हालांकि बाद में उमेश शर्मा का राशन कोटा लाइसेंस निरस्त कर दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल लाइसेंस निरस्तीकरण इस गंभीर मामले में पर्याप्त नहीं है। न तो एफआईआर दर्ज की गई, न ही सरकारी राशन की रिकवरी हुई और न ही रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई गई।
फर्जी शपथपत्र से प्रशासन को गुमराह करने का आरोप
प्रार्थना पत्र में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि कोटा लाइसेंस से जुड़े मामलों में उमेश शर्मा ने अपनी पत्नी (ग्राम प्रधान) से संबंध विच्छेद दर्शाने के लिए एक शपथपत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत किया, लेकिन उसके समर्थन में किसी न्यायालय का आदेश या वैधानिक दस्तावेज नहीं दिया गया। इसे प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास बताया गया है।
शिकायतकर्ता अजीत सिंह गौर ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर एफआईआर, सरकारी क्षति की रिकवरी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराई जाए। प्रार्थना पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद, मंडलायुक्त बरेली सहित अन्य अधिकारियों को भी भेजी गई है।


























