स्वर्गीय पिता की काव्य-चेतना को बेटी दे रही नई उड़ान, बदायूं से देश-विदेश तक गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’,

बदायूं। देशभक्ति, राष्ट्रचेतना और साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में बदायूं जनपद से एक सराहनीय पहल की गई है। आचमन फाउंडेशन, बदायूं द्वारा जनपद स्तरीय काव्य प्रतियोगिता ‘गाएंगे गाएंगे हम वंदे मातरम्’ का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर तथा बदायूं की साहित्यिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने वाले स्वर्गीय ओज के प्रखर कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार की स्मृति को समर्पित है।

गौरतलब है कि डॉ. उर्मिलेश शंखधार ने अपनी बहुचर्चित राष्ट्रवादी कविता ‘गाएंगे गाएंगे हम वंदे मातरम्’ के माध्यम से न केवल तत्कालीन समाज को झकझोरा, बल्कि भारत की राष्ट्रचेतना को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनकी कविताओं ने बदायूं को साहित्यिक मानचित्र पर एक अलग पहचान दिलाई।

इसी काव्य-परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनकी बड़ी पुत्री एवं आचमन फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. सोनरूपा विशाल अपने पिता के विचारों, राष्ट्रप्रेम और साहित्यिक मूल्यों को निरंतर आगे बढ़ा रही हैं। डॉ. सोनरूपा विशाल आज काव्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से न सिर्फ अपने पिता का नाम, बल्कि बदायूं जनपद का नाम भी देश ही नहीं, विदेशों तक रोशन कर रही हैं।

डॉ. सोनरूपा विशाल ने बताया कि इस काव्य प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल बदायूं जनपद के निवासियों के लिए आयोजित की जा रही है, जिससे स्थानीय साहित्यकारों और नवोदित कवियों को प्रोत्साहन मिल सके।

प्रतियोगिता के प्रमुख नियम

  • प्रतियोगिता केवल बदायूं जनपद के निवासियों हेतु।
  • रचना राष्ट्रवादी विषय पर आधारित एवं पूर्णतः मौलिक होनी चाहिए।
  • प्रत्येक प्रतिभागी की केवल एक रचना ही मान्य होगी।
  • रचना के साथ नाम, आयु, पता और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य।
  • किसी अन्य की रचना की नकल या पूर्व प्रकाशित रचना अमान्य होगी।
  • निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
  • प्रतियोगिता सभी आयु वर्ग के लिए खुली है।

प्रविष्टि प्रक्रिया

प्रतिभागी आचमन फाउंडेशन की वेबसाइट www.aachman.org पर जाकर निर्धारित फॉर्म भरकर अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं।
प्रविष्टि की अंतिम तिथि: 20 जनवरी 2026

पुरस्कार व सम्मान
  • सर्वश्रेष्ठ तीन रचनाओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
  • 10 अन्य चयनित प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
  • सभी पुरस्कार आचमन फाउंडेशन के वार्षिक उत्सव में प्रदान किए जाएंगे, जिसका आयोजन आगामी माह प्रस्तावित है।

चयनित प्रतिभागियों की सूची गणतंत्र दिवस से एक दिन पूर्व आचमन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, समाचार पत्रों एवं डिजिटल न्यूज चैनलों के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी।

यह प्रतियोगिता न केवल स्वर्गीय डॉ. उर्मिलेश शंखधार को सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि बदायूं की साहित्यिक परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है, और एक बेटी अपने पिता की लेखनी को विश्व पटल तक पहुंचाने के संकल्प के साथ निरंतर सक्रिय है।

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