बिल्सी (बदायूं)। बिल्सी नगर में एक शादी की बधाई मांगने को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद उस समय तूल पकड़ गया, जब एक परिवार की गंभीर पारिवारिक मजबूरी और बीमारी को नजरअंदाज कर दी गई। मामला इतना बढ़ गया कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई और अंततः थाना पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार बिल्सी नगर के मोहल्ला नंबर पांच निवासी एक कपड़ा व्यापारी के पुत्र की शादी 16 नवंबर को संपन्न हुई थी। बुधवार की सुबह करीब आधा दर्जन किन्नर उनके आवास पर बधाई मांगने पहुंचे। बताया जाता है कि किन्नरों द्वारा बधाई के तौर पर 51 हजार रुपये की मांग रखी गई।

परिवारजनों का कहना है कि जिस घर में शादी हुई है, वहीं परिवार का एक सदस्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसका इलाज लंबे समय से चल रहा है। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे परिजनों ने इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई और अपनी स्थिति से किन्नरों को अवगत भी कराया।

परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद किन्नरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिससे बात कहासुनी से आगे बढ़कर हंगामे में बदल गई। कुछ ही देर में किन्नर घर के बाहर सड़क पर आकर शोर-शराबा और प्रदर्शन करने लगे, जिससे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ एकत्र हो गई।

दोनों पक्ष पहुंचे थाने

विवाद बढ़ता देख लड़का पक्ष ने थाने पुलिस को सूचना देकर पुलिस बुला ली,सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस का कहना है कि किसी भी पक्ष की ओर से गंभीर चोट की सूचना नहीं है और फिलहाल मामला शांतिपूर्ण ढंग से निपटा दिया गया है।

इंसानियत बनाम दबाव पर सवाल

इस घटना ने समाज में एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कोई परिवार बीमारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा हो, तब उस पर सामाजिक परंपराओं के नाम पर दबाव डालना कितना उचित है? मोहल्ले के लोगों का कहना है कि बधाई परंपरा है, लेकिन मजबूरी और मानवीय संवेदना को भी समझा जाना चाहिए।

फिलहाल पुलिस की मध्यस्थता से मामला शांत हो गया है, लेकिन यह घटना सामाजिक संवेदनशीलता और परंपराओं की सीमाओं पर एक नई बहस छोड़ गई है।

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