बीडीओ ने की सख्त कार्रवाई की संस्तुति



बदायूं। जनपद बदायूं के विकास खण्ड सालारपुर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलने वाले सरकारी पोषाहार के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि दो आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां—जो आपस में मां-बेटी हैं—ने लंबे समय से न सिर्फ पोषाहार वितरण बंद कर रखा था, बल्कि शिकायत करने पर ग्रामीण महिलाओं को छेड़छाड़ और हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी भी दी जा रही थी।
यह मामला ग्राम पंचायत हसनपुर और फकीराबाद से जुड़ा है, जहां बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकत्री कीर्ति शास्त्री (हसनपुर) और ममता (फकीराबाद) पर गंभीर आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि विकास खण्ड सालारपुर प्रदेश के 100 आकांक्षात्मक विकास खण्डों में शामिल है।
शिकायत के बाद हुआ खुलासा
मुख्यमंत्री शोधार्थी के रूप में सालारपुर ब्लॉक में कार्यरत मयंक सिंह को सूचना मिली कि संबंधित गांवों में न तो आंगनवाड़ी केंद्र खोले जा रहे हैं और न ही गर्भवती महिलाओं व बच्चों को मिलने वाला पोषाहार वितरित किया जा रहा है। शिकायत की जांच करने पर आरोप सही पाए गए, जिसकी आख्या खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) नितिन कुमार को सौंपी गई।
इसके बाद बीडीओ सालारपुर द्वारा दोनों गांवों में कराई गई जांच में पुष्टि हुई कि दोनों आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां न तो नियमित रूप से केंद्रों पर उपस्थित रहती हैं और न ही पोषाहार वितरण किया जा रहा है।
महिलाओं ने बयां किया दर्द
जांच के दौरान ग्राम हसनपुर की पूजा, आरती, कुसुमा, सुषमा और सुमन, तथा ग्राम फकीराबाद की रामप्यारी, गोमती और ऊषा ने बयान देकर बताया कि उन्हें लंबे समय से पोषाहार नहीं मिल रहा। मांग करने या शिकायत करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है और एससी एक्ट में फंसाने की धमकी दी जाती है।
मां-बेटी मिलकर कर रही थीं गबन
जांच में यह भी सामने आया कि कीर्ति शास्त्री और ममता आपस में मां-बेटी हैं और दोनों मिलकर बाल विकास विभाग के पोषाहार का गबन कर रही थीं। इस खुलासे के बाद मामले को और गंभीर मानते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
सख्त कार्रवाई की संस्तुति
खण्ड विकास अधिकारी नितिन कुमार ने शिकायत सही पाए जाने पर दोनों आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की संस्तुति करते हुए पूरी जांच रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को प्रेषित कर दी है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और बच्चों का पोषण है, वही योजनाएं यदि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएं तो जिम्मेदारी किसकी होगी? साथ ही पीड़ित महिलाओं को धमकाकर चुप कराने की कोशिश प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है।


























