बदायूं। ग्रामीण विकास व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ग्राम पंचायत सचिवों का सत्याग्रह आंदोलन बदायूं जनपद में अब और तेज हो गया है। भत्तों में बढ़ोतरी, संसाधनों की उपलब्धता और कार्य परिस्थितियों में सुधार को लेकर कई सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन ने बुधवार को तीसरे चरण में प्रवेश किया, जो अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पहले भी उठ चुकी हैं मांगें

  • ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली और अत्यधिक फील्डवर्क के बोझ को लेकर जोरदार आपत्ति जता रहे हैं,
  • जिले के कई ब्लॉकों में सचिवों ने यह भी कहा था कि उनके पास पर्याप्त वाहन भत्ता, नहीं है।
  • “सचिवों पर सभी योजनाओं का भार और जिम्मेदारी तो बढ़ती जा रही है, लेकिन सुविधाएँ वर्षों से जस की तस हैं।”

सचिवों को राजस्व, विकास, आवास, शौचालय, पेंशन, मनरेगा, बजट, पोर्टल एंट्री—सब कुछ स्वयं ही संभालना पड़ रहा है, जिससे सरकारी कार्य की गति भी प्रभावित हो रही है।

तीसरे चरण में अद्भुत एकजुटता: साइकिल, टिर्री, रोडवेज और डग्गामार वाहनों से पहुंचे क्षेत्र

आंदोलन का तीसरा चरण बुधवार से प्रारंभ हुआ, जिसके तहत बदायूं जनपद के सभी सचिवों ने निर्णय लिया कि अब वे यंत्र चालित निजी वाहनों का उपयोग बिल्कुल नहीं करेंगे।

बाइक की जगह बुधवार को विभिन्न ब्लॉकों में सचिव—साइकिल,टिर्री, रोडवेज बस,डग्गामार वाहनों से अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में पहुँचे।यह दृश्य पूरे जिले में एक प्रतीकात्मक संदेश बन गया—“जब सरकार वाहन भत्ता नहीं बढ़ाएगी तो सचिव खुद भी निजी वाहन नहीं चलाएंगे।”

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी सचिवों के इस शांतिपूर्ण और रचनात्मक विरोध को सराहा। कई लोगों ने कहा कि सचिवों का यह कदम “बिना शोर, बिना टकराव—शांतिपूर्ण तरीके से अपना दर्द कहने का सबसे प्रभावी तरीका है।”

सचिवों की समन्वय समिति का कहना है कि “ग्रामीण विकास के लक्ष्य सचिवों के माध्यम से ही पूरे होते हैं, इसलिए सचिवों की कार्य सुविधा को मजबूत करना जरूरी है।”

शांतिपूर्ण सत्याग्रह, लेकिन आवाज मजबूत

बदायूं समन्वय समिति ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े कार्य बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होंगे। समिति के पदाधिकारी विशाल पटेल, अवधेश शाक्य, रीना पाठक, नदीम हुसैन, रमेश पाल, अजय पाल, अमोल पाराशर, गुलबहार, नवीन शर्मा, रामौतार पाल, प्रवीण पांडे ने कहा—

“यह आंदोलन सरकार से टकराव नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और कार्य-परिस्थितियों में सुधार की मांग है। हम सभी सचिव शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से सत्याग्रह को आगे बढ़ा रहे हैं।”उन्होंने बताया कि यह चरण आगे भी जारी रहेगा।

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