





बदायूं। शहर में कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाली घटना बुधवार देर रात सामने आई, जब संतोष सिंह चौराहा के पास मिशन इंग्लिश स्कूल और चैरिटेबल ब्लड सेंटर के सामने सड़क पर खराबी के कारण खड़े ट्रक में तेज रफ्तार महिंद्रा थार (UP25EA2323) ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह कार भाजपा नेता ठाकुर राजीव प्रताप सिंह के बेटे रजत प्रताप सिंह चला रहा था, जो शराब के नशे में धुत्त बताया जा रहा है।
गाड़ी में शराब की बोतलें और विधानसभा पास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार के भीतर शराब की बोतलें, गिलास और शराब पीने के सबूत खुले पड़े मिले। हैरानी की बात यह भी है कि थार गाड़ी पर विधानसभा का पास लगा हुआ था, जबकि रजत के परिवार में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि यह पास कहाँ से आया और किसके नाम का है।
पुलिसकर्मी को सड़क पर घसीट-घसीट कर पीटा
टक्कर की सूचना पर मौके पर पहुंचे मंडी चौकी के सिपाही लवलेश कुमार यादव ने जब सामान्य पूछताछ की, तभी नशे में चूर रजत सिंह भड़क उठा।रजत ने गाड़ी से उतरकर सिपाही को सड़क पर खुलेआम जमकर पीटा, यहां तक कि उसने अपना लाइसेंसी हथियार भी निकाल लिया, जिससे माहौल और भयावह हो गया।
भागने की कोशिश, लेकिन गाड़ी नहीं हुई स्टार्ट
घटना के बाद रजत अपनी कार स्टार्ट कर भागने की कोशिश करता रहा, लेकिन गाड़ी में से धुआँ निकलने लगा। भीड़ ने उसे रोकने की कोशिश की, मगर वह उल्टा लोगों पर ही भड़कता रहा और हथियार लहराता रहा।
पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हैरानी की बात यह है कि रजत पुलिस के बीच से चकमा देकर भाग निकलने में कामयाब हो गया।
बड़ा सवाल- क्या बदायूं में दबँगो का मनोबल बढ़ता जा रहा है?
बदायूं में पिछले कुछ महीनों में पुलिस पर हमले और दबंगई की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं—
- कुछ दिन पहले एक दरोगा को वकीलों द्वारा पीटने का वीडियो वायरल हुआ था।
- अब भाजपा नेता के बेटे द्वारा सिपाही को सड़क पर पीटना, वह भी नशे में, और फिर हथियार निकालकर पुलिस को धमकाना…
- इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई बड़ी कार्रवाई न होना, जनता के मन में कई सवाल खड़े करता है।
क्या राजनेताओं के दबाब मे है पुलिस या पुलिस का मनोबल टूट रहा है?
जब पुलिस पर हमला करने वाले आसानी से छूट जाते हैं या मौके से भाग जाते हैं, तो यह साफ संकेत है कि पुलिस का मनोबल लगातार कमजोर हो रहा है।
क्या दबंगई को संरक्षण मिल रहा है?
यूपी पुलिस द्वारा जिन मामलों में तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, उस पर देरी होना यह संदेह पैदा करता है कि क्या राजनीतिक दबाव या अन्य कारणों से कार्रवाई धीमी है?
क्या ऐसे मामले बदायूं को “जंगल राज” की ओर धकेल रहे हैं?
जब आरोपी पुलिस को धक्का देकर भाग जाएं, हथियार लहराएं, और उस पर भी पुलिस हाथ-पैर मारती रह जाए —
तो बदायूं में कानून-व्यवस्था को लेकर यह बेहद चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
दबी ज़ुबा से हो रही तुलना — बरेली में बुलडोजर चला, बदायूं में चुप्पी क्यों?
हाल ही में बरेली में पुलिस से धक्का-मुक्की और दंगा भड़काने वालों के घरों पर बुलडोजर चलाए गए,
लेकिन बदायूं में:
- सिपाही को पीटा गया,
- पुलिस को धमकाया गया,
- विधान सभा पास का दुरुपयोग दिखा,
- नशे में हथियार लहराया गया…फिर भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं, न गिरफ्तारी, न सीज़िंग, न मीडिया बयान।ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि
- क्या कानून सबके लिए समान है?
- क्या प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्यवाही धीमी पड़ जाती है?
यह पूरा प्रकरण न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अगर कार्रवाई मजबूत और समय पर नहीं हुई,
तो बदायूं में दबंगई और बढ़ेगी, पुलिस का मनोबल गिरेगा और अपराधियों को खुली छूट मिलेगी।


























