अमरोहा (उत्तर प्रदेश)। यूपी के अमरोहा से एक ऐसी हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। एक भीषण सड़क हादसे में चार MBBS डॉक्टर बनने की राह में इंटर्नशिप कर रहे थे. बुधवार रात चार दोस्त आयुष शर्मा, श्रेयस पंचोली, सप्त ऋषि दास और अरनब चक्रवर्ती पार्टी करने के लिए एक होटल गए थे. रात करीब 10 बजे चारों डॉक्टर यूनिवर्सिटी लौट रहे थे.इसी बीच 7 किलोमीटर पहले नेशनल हाईवे-9 की सर्विस लेन रजबपुर थाना क्षेत्र में अतरासी गांव के पास फ्लाईओवर स्थित एक रेस्टोरेंट के सामने इनकी स्विफ्ट डिजायर कार अनियंत्रित होकर फोम के गद्दे से लदे डीसीएम ट्रक मे पीछे से जा घुसी जिससे चारों की दर्दनाक मौत हो गई।

जान गंवाने वालों में एक दिल्ली तो दूसरा त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। सबसे मार्मिक बात यह रही कि चारों अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे थे -मां-बाप का सहारा, घर की उम्मीद, और भविष्य का सपना… सब कुछ एक पल में मिट्टी में मिल गया।

टक्कर के दौरान कार के अगले दोनों एयर बैग खुल गए थे, लेकिन इसके बावजूद चारों डॉक्टरों की मौत हो गई. सूचना मिलते ही हादसे की जानकारी मिलते ही सीओ सिटी अभिषेक यादव और थानाध्यक्ष कोमल तोमर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से शवों को कार से बाहर निकाला गया। यूनिवर्सिटी के प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी भी स्टाफ के साथ घटनास्थल पर पहुंचे उन्होंने चारों छात्रों की शिनाख्त की।पुलिस ने सभी शवों को मोर्चरी भेजकर परिजनों से संपर्क शुरू कर दिया है। मृतक छात्रों ने साल 2020 में MBBS में एडमिशन लिया था. इस घटना मृतक छात्रों के साथ काम करने और पढ़ने वाले छात्रों को हिलाकर रख दिया है.

यह भयावह हादसा गजरौला क्षेत्र के अतरासी गांव के पास हुआ, जहां पार्टी में शामिल होने के बाद चारों युवक स्विफ्ट डिजायर कार से श्री वेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी लौट रहे थे। यूनिवर्सिटी उनसे महज 7 किलोमीटर ही दूर थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

टक्कर इतनी भीषण कि कार ट्रक में समा गई

रात के सन्नाटे में उनकी कार तेज रफ्तार ट्रक (डीसीएम) में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह ट्रक में घुस गया
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर की मदद से कार को ट्रक से अलग कराया, फिर गाड़ी को काटकर बड़ी मशक्कत से शवों को बाहर निकाला गया। यह मंजर देखकर मौजूद लोगों की रूह कांप उठी।

चार परिवारों की दुनिया उजड़ी

चारों युवक MBBS के छात्र थे और डॉक्टर बनने का सपना लेकर पढ़ाई कर रहे थे। चारों ही अपने-अपने घरों के इकलौते वारिस थे। हादसे की खबर जैसे ही उनके घरों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। मां-बाप बेसुध हो गए। घर की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।

चारों डॉक्टर अपने परिवार के इकलौते बेटे

  • आयुष के पिता दिल्ली पुलिस में ASI के पद पर तैनात हैं। श्रेष्ठ की बड़ी बहन शैलेजा की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन सुमेधा MBBS के बाद मथुरा के केडी हॉस्पिटल में इंटर्नशिप कर रहती है। हादसे की सूचना रात करीब 12 बजे सुमेधा ने ही परिवार को दी थी।
  • श्रेष्ठ के पिता बलराम सरकारी शिक्षक थे और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीएलओ का काम देखते समय सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। अब घर में केवल मां माधुरी हैं, जो सरकारी टीचर हैं।
  • अर्णब (25) पुत्र अरुण कुमार चक्रवर्ती 164- पूरबापड़ा, बेलघरिया नॉर्थ, पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। वहीं, सप्तऋषि (24) पुत्र सुशांता शेखर दास रामनगर, अगरतला, वेस्ट त्रिपुरा का रहने वाला था। दोनों ही अपने-अपने परिवार के इकलौते बेटे थे।
बस 7 किलोमीटर पहले जिंदगी ने साथ छोड़ दिया

पार्टी से लौटते वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनका आखिरी सफर बन जाएगा। महज 7 किलोमीटर पहले किस्मत ने ऐसा मोड़ ले लिया कि चार जिंदगियां एक झटके में खत्म हो गईं।अतरासी गांव के पास उस रात जो चीखें गूंजीं, वे आज भी लोगों के दिलों को चीर रही हैं।

एक पल की चूक, उम्रभर का दर्द

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि जिंदगी का कोई भरोसा नहीं। सड़क पर एक सेकंड की चूक कितने घरों को उजाड़ सकती है, इसका यह दर्दनाक उदाहरण है। जैसा कहा गया है –“जिंदगी का भरोसा नहीं… परवाह उन रिश्तों की करो, जिनकी सांसें आपकी सलामती से चलती हैं।”

स्वदेश केसरी परिवार भी ईश्वरसे दिवंगत आत्माओं को शांति देने और शोकग्रस्त माता-पिता को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता है।

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