बिल्सी। नगर का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग-बिल्सी बिजलीघर रोड, जो बदायूं बरेली जाने वाले नगरवासियों के व्यापार और आवागमन की लाइफलाइन माना जाता है,कई दशकों से आज भी कीचड़, गंदगी और जलभराव का प्रतीक बन चुका है। हालत इतनी बदतर है कि पैदल चलना तो दूर,दो पहिया वाहन चालकों को भी रोजाना जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है।

यह वही सड़क है जिससे होकर हजारों लोग, स्कूली बच्चे, व्यापारी और आम नागरिक रोजाना गुजरते हैं। लेकिन सड़क की दशा देखकर साफ लगता है कि पालिका प्रशासन हो या जनप्रतिनिधि-किसी ने भी इस समस्या को कभी गंभीरता से लिया ही नहीं।

सालों मे कई बार सड़क-नाली बनी,नेताओं को कमीशन भी मिला… लेकिन जनता की समस्या जस की तस

नगर के लोगों का साफ कहना है कि कई बार “सड़क भी बनी, नाली भी बनी, कागजों में बार बार मरम्मत भी हुई… लेकिन समस्या कभी खत्म ही नहीं हुई। सिर्फ ठेकेदार, अफसर और कुछ जिम्मेदार लोग ही इससे से आर्थिक लाभ में रहे।”

बारिश होते ही बिजलीघर रोड पर पानी दो-दो फीट ऊपर तक भर जाता है। सड़क पर नाले की तरह पानी बहने लगता है। इसी गंदे पानी में से होकर रोज छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं और कई बार फिसलकर घायल हो जाते हैं।रोजाना कई मोटरसाईकिल सवार, साईकिल से चलने वाले लोग फिसल कर चोटिल होते रहते हैं,,

किंतु आज तक इस वार्ड से चुने जाने वाले किसी सभासद की इतनी पॉवर नहीं हुई जिससे वो अपने वार्ड की इस मूलभूत विकट समस्या का स्थाई समाधान करा सके,न कोई नगर पालिका अध्यक्ष ऐसा बना जो इस समस्या को प्राथमिकता देकर इस समस्या का स्थाई समाधान करा सका, और न ही कोई विधायक और सांसद एमएलसी कभी शहर की नासूर बन चुकी समस्या को गंभीरता से ले पाया।

नगर की सियासत को जनता की नहीं, सिर्फ कुर्सी की चिंता- जनता आज भी असहाय

बिल्सी के लोगों के गुस्से मे अब उवाल नहीं रहा, लोग बार-बार शिकायतें करते-करते अब थक चुके हैं।अब स्थिति यह है कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने में खुद को असहाय महसूस कर रही है, राजनीतिक पार्टियाँ केवल चुनाव आने पर ही नगर की समस्याओं को समाधान का झुनझुना थमा कर वोट हासिल कर लेती हैं।फिर पांच साल मौज मे कब कट जाते हैं पता ही नहीं चलता,,नगर की यह सड़क सिर्फ समस्या नहीं,यह बिल्सी नगर की जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और प्रशासन की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

मुख्य बाजार और पालिका कार्यालय के सामने भी वही हाल

बिजलीघर रोड की तरह ही,बारिश में नगर पालिका कार्यालय के सामने मुख्य बाजार में भी स्थिति नर्क जैसी बन जाती है।पूरे बाजार में जलभराव, दुर्गंध और कीचड़ से हालात बदतर हो जाते हैं।लेकिन इसके बाद भी न कोई कार्रवाई होती है और न कोई ठोस योजना बनती है।

इस समस्या को जनता अब अपना भाग्य मान बैठी

सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब लोग इस समस्या पर बोलने तक को तैयार नहीं हैं। उन्होंने इस नरकीय स्थिति को अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लिया है।नगर के एक बुजुर्ग निवासी ने कड़वा सच कह दिया-“यहां सड़क की चिंता न नेता को है, न प्रशासन को।अब हमें इस गंदगी में जीना हमारा नसीब है।”

स्वदेश केसरी का सवाल-आखिर बिल्सी की कैंसर रुपी समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी किसकी ?

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