बदायूं।रुहेलखंड का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाला ककोड़ा मेला आज पूरे शबाब पर आ जायेगा। कादरचौक के खादर क्षेत्र मे गंगा तट पर लगने वाला यह पावन मेला “मिनी कुंभ” का ही स्वरूप है। शनिवार से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा स्नान और कई दिनों के प्रवास के लिए लगातार पहुंच रही है जहां पहुंच कर श्रद्धालू गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करते दिख रहे है।

आस्था से ओत-प्रोत यह मेला बदायूं जनपद के साथ-साथ शाहजहांपुर, रामपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद, बरेली और आस-पास के जिलों के श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण का केंद्र होता है। दूर-दूर से आने वाले लोग टेंट राउटी और झोपड़ियां लगाकर प्रवास शुरू कर चुके हैं। कई परिवार 5 से 7 दिन तक यहीं रहकर गंगास्नान, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।

धार्मिक आस्था और परंपरा का केंद्र

ककोड़ा मेले को स्थानीय लोग “मिनी कुंभ” के नाम से पुकारते हैं। लोगों मे मान्यता है कि इस मेले के दौरान गंगा तट पर छोटे बच्चों का मुंडन करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी वजह से हर साल हजारों परिवार यहां आकर अपने बच्चों के मुंडन संस्कार, कथा हवन और पूजापाठ -विधि विधान से सम्पन्न कराते हैं।
गंगा के घाटों पर ‘हर-हर गंगे’ और घंटा-घड़ियाल की गूंज वातावरण को पवित्र बना देती है।

मेले में रौनक चरम पर, हर ओर उत्सव का माहौल

गंगा तट से लेकर बाजार तक हर तरफ रौनक होना शुरू हो चुकी है। झूले, मौत का कुआं, सर्कस और खिलौनों के स्टॉल सोफ्टी की दुकाने बच्चों और युवाओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
खाने-पीने के शौकीनों के लिए मिठाई, फास्टफूड और चाट-पकौड़ी के ठेले सज चुके हैं। वहीं मीना बाजार, बर्तन, लकड़ी और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी है।

शाम होते ही पूरा मेला जगमग रोशनी से नहा उठता है। झालरों और दुकानों की जगमगाहट से पूरा ककोड़ा गंगा तट एक भव्य धार्मिक नगर में तब्दील हो जाता है।

प्रशासन सतर्क, मेला क्षेत्र में अस्थायी कोतवाली और सुरक्षा प्रबंधन

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त कर दिया है। मेला क्षेत्र में अस्थायी कोतवाली, पुलिस चौकियां, कंट्रोल रूम, चिकित्सा शिविर और अग्निशमन दल की टीमें सक्रिय हैं।सीओ और एसडीएम स्तर के अधिकारी लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।

बदायूं एसएसपी ने पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की है, जबकि परिवहन विभाग ने अतिरिक्त रोडवेज और प्राइवेट बसें चलाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बना दी है।

अनैतिक गतिविधियों पर कड़ी निगरानी

पुराने समय में यह मेला जुआ खेलने वालों का केंद्र भी माना जाता था, लेकिन प्रशासन की कड़ी निगरानी और लगातार कार्रवाई से अब उस पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है। फिर भी प्रशासन की पूरी टीम सतर्क है ताकि मेले की पवित्रता और धार्मिकता बनी रहे।

भक्ति, व्यापार और लोक संस्कृति का संगम

ककोड़ा मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, मेल-जोल और आनंद का उत्सव है। ग्रामीणों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और परिवारों का एक साथ संगम इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।लोग यहां अपने रिश्तेदारों को बुलाकर गंगा तट की इस आध्यात्मिक यात्रा में शामिल करते हैं — यही कारण है कि यह मेला बदायूं की धार्मिक पहचान बन चुका है।

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