सपा में गुटबाज़ी चरम पर, सोशल मीडिया पर उड़ रही थीं धज्जियां अब पूरे संगठन की होगी ‘संगठनात्मक सर्जरी’

बदायूं।समाजवादी पार्टी के बदायूं इकाई में लंबे समय से चल रही अंदरूनी कलह आखिर फूट पड़ी। गुटबाजी के इस आलम का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि सपा के छोटे-छोटे भैया नेता भी सोशल मीडिया पर अपने ही बड़े नेताओं की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे थे।
हर दिन कोई न कोई ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ किसी सपा नेता पर वायरल हो जाती थी -जिससे जिले की राजनीतिक फिज़ा में हलचल मच जाती थी। ऐसे माहौल में पुराने अनुभवी नेता अपने को ‘सुरक्षित’ महसूस करने लगे थे, जबकि सक्रिय कार्यकर्ता असमंजस में पड़ गए थे कि पार्टी में कौन-सा गुट किसका है।इन्हीं हालातों ने आखिरकार सपा नेतृत्व को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
संगठन में बड़ा फेरबदल-सिर्फ जिलाध्यक्ष बचे, बाकी पूरी कार्यकारिणी भंग
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार देर रात बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए जिलाध्यक्ष को छोड़कर पूरी जिला कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह आदेश पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने जारी किया।
पार्टी द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि बदायूं जिला कमेटी के सभी पदाधिकारी, सदस्य, महिला सभा, युवजन सभा, छात्र सभा, लोहिया वाहिनी और अल्पसंख्यक सभा जैसे सभी मोर्चों के जिलाध्यक्ष और उनके पदाधिकारी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किए जाते हैं।
अखिलेश यादव के निर्देश पर चली सर्जरी
सूत्रों के मुताबिक, यह सख्त कार्रवाई सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सीधे निर्देश पर की गई है।
अखिलेश यादव ने प्रदेश नेतृत्व से कहा था कि आगामी विधानसभा और पंचायत चुनावों को देखते हुए संगठन में नई ऊर्जा और एकता जरूरी है।
इसी दिशा में यह फैसला लिया गया ताकि संगठन के भीतर जमी गुटबाज़ी की जड़ों को खत्म किया जा सके और निष्ठावान, सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जा सके।
प्रदेश अध्यक्ष बोले – “अनुशासनहीनता अब बर्दाश्त नहीं”
प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने कहा,“बदायूं में गुटबाजी और अनुशासनहीनता को समाप्त करने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। हमारा लक्ष्य संगठन को पुनर्गठित कर मजबूत बनाना है। आने वाले दिनों में नई कार्यकारिणी में उन चेहरों को जिम्मेदारी दी जाएगी जो जनता से जुड़े हैं और पार्टी की विचारधारा के प्रति वफादार हैं।”
गुटबाज़ी से नुकसान, अब नई टीम पर टिकी नजरें
पिछले कुछ महीनों से जिले की सपा इकाई दो खेमों में बंट गई थी। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने पार्टी की साख को कमजोर किया।अब देखना यह होगा कि क्या इस सर्जिकल कार्रवाई से सपा की गुटबाज़ी खत्म होगी या केवल एक गुट का वर्चस्व टूटेगा।
अगर यह अंतर्विरोध फिर से पनपा तो आने वाले ग्राम पंचायत और विधानसभा चुनावों में सपा को इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल बदायूं के सपा कार्यकर्ताओं की निगाहें नई कार्यकारिणी के गठन पर टिकी हैं -कौन रहेगा, कौन जाएगा और किस पर अखिलेश यादव का भरोसा टिकेगा, यही अब अगली राजनीतिक सुर्खी बनेगी।


























