
बदायूं/उझानी। बरेली–मथुरा हाईवे पर मंगलवार देर रात उझानी क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें रोडवेज बस खड़े ट्रक से जा भिड़ी। इस हादसे में आईटीबीपी जवान धर्मेंद्र कुमार (45 वर्ष) और बस चालक हाकिम सिंह (56 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नौ यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसा उझानी कोतवाली क्षेत्र के वितरोई मोड़ के पास हुआ। बस में करीब 45 यात्री सवार थे। टक्कर इतनी तेज थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना पर पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
मृतक:
- धर्मेंद्र कुमार (45 वर्ष), निवासी गोछना, थाना घिरौर, मैनपुरी – आईटीबीपी जवान
- हाकिम सिंह (56 वर्ष), निवासी सैंया, आगरा – बस चालक
गंभीर घायल यात्रियों में शामिल:
राम अवतार (आगरा), गोपाल शर्मा और उनकी बेटी अंजू (अलीगढ़), तनवीर और अफरीद (बरेली), एकनाथ (महाराष्ट्र), दीपाली (शोलापुर), कमला देवी (अलीगढ़) समेत कई यात्री।
सभी घायलों को सीएचसी उझानी में भर्ती कराया गया, जहां से डॉ. सर्वेश कुमार की देखरेख में नौ गंभीर घायलों को राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं रेफर किया गया। पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल
“जब चाँद तक पहुँच गए वैज्ञानिक, तो क्यों नहीं बना पाए दुर्घटना रोकने की तकनीक?”
जहां भारत के वैज्ञानिक चांद तक पहुंच चुके हैं, परमाणु बम और मिसाइल तकनीक में दुनिया को पीछे छोड़ रहे हैं — वहीं मानव जीवन की सुरक्षा के मामले में अभी भी बहुत कुछ बाकी है।
आज भी बसों, कारों और ट्रेनों में होने वाली दुर्घटनाओं के कारणों का सही पता नहीं चल पाता। क्योंकि न तो इन वाहनों में फ्रंट और बैक कैमरे अनिवार्य हैं, न ही ड्राइवर और सवारियों पर नजर रखने वाले इन-बिल्ट सीसीटीवी।
सरकार को चाहिए कि जैसे चार एयरबैग को अनिवार्य किया गया है, उसी तरह हर चार और दो पहिया वाहन — चाहे वह निजी हो या व्यावसायिक, उसमें आगे-पीछे और अंदर की साइड कैमरे लगाए जाएं।
🔹 इससे दुर्घटना के बाद यह पता चल सकेगा कि गलती किसकी थी — ड्राइवर की, सड़क की स्थिति की, या किसी और वजह की।
🔹 अगर ड्राइवर को झपकी आई थी, तो कैमरे की रिकॉर्डिंग से यह भी साफ हो जाएगा।
🔹 वहीं सवारी वाहनों में कैमरा सिस्टम लूट, चोरी और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर भी रोक लगा सकता है।
यह समय है कि सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां मिलकर सड़क सुरक्षा में तकनीक का उपयोग अनिवार्य करें — ताकि अगली खबर किसी हादसे की नहीं, बल्कि सुरक्षा के नए आविष्कार की हो।


























