छोटी नित्या ने जन्मदिन पर दी बेज़ुबानों के लिए अपनी गुल्लक




बदायूं। जहां आज के बच्चे जन्मदिन पर खिलौने, कपड़े या केक पार्टी की ख्वाहिश रखते हैं, वहीं बदायूं शहर की नन्ही नित्या उपाध्याय ने अपने जन्मदिन को सेवा और संवेदना के साथ मनाकर समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई।
नित्या, जो बदायूं शहर के प्रसिद्ध लावेला रेस्टोरेंट परिवार से हैं, अपने बाबा ओम नारायण उपाध्याय (मंडी समिति गेट पर रेस्टोरेंट संचालक) दादी मधु उपाध्याय हाउस वाइफ हैं और पिता अभिषेक उपाध्याय (अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट व बदायूं कोर्ट) के साथ अपने जन्मदिन पर ग्राम गुरपीर विनायक निकट सिलहरी स्थित पशु-पक्षी सेवा धाम पहुंचीं।
यहां पहुंचकर नित्या ने अपनी गुल्लक, जिसमें वह कई दिनों से थोड़े-थोड़े पैसे बचा रही थी, पशु-पक्षी धाम के संचालक विकेंद्र शर्मा को बेजुबानों के भोजन और इलाज हेतु समर्पित कर दी। जब गुल्लक को खोला गया तो उसमें 5076 रुपये निकले।
इस अवसर पर नित्या के बाबा ओम नारायण उपाध्याय, दादी मधु उपाध्याय और पिता अभिषेक उपाध्याय उपस्थित रहे। परिवार के सभी सदस्यों ने कहा — “बात रुपए की नहीं, भावना की है। जिस उम्र में बच्चे अपने लिए सोचते हैं, उस उम्र में नित्या ने दूसरों के लिए सोचकर एक मिसाल कायम की है।”
नित्या के इस कार्य से शहर और गांव के लोगों में भी संदेश गया कि संस्कार अगर सच्चे हों तो बच्चे बचपन में ही समाजसेवा की राह पर चल पड़ते हैं।स्वदेश केसरी परिवार भी ईश्वर से नित्या के दीर्घायु, स्वस्थ जीवन और उज्जवल भविष्य की कामना करता है- और उम्मीद करता है नित्या बड़े होकर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने।
प्रेरणा –
“गुल्लक में सिर्फ पैसे नहीं, संस्कार थे”
आज जब दुनिया बच्चों को भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर धकेल रही है, नित्या जैसी बालिकाएँ याद दिलाती हैं कि असली संपत्ति पैसे नहीं, बल्कि संवेदना और सेवा की भावना है। यह छोटी बच्ची हमें सिखाती है कि दूसरों के लिए थोड़ा देना ही असली इंसानियत है।जहां बच्चे मांगते हैं तोहफे, वहां नित्या ने दी इंसानियत का उपहार- गुल्लक समर्पित कर समाज के सभी वर्ग का दिल जीत लिया।


























