बदायूं जनपद में भारतीय जनता पार्टी के अंदर एक बार फिर असंतोष और गुटबाज़ी के स्वर तेज़ होते दिखाई दे रहे हैं। जिले के एक भाजपा नेता और पूर्व पदाधिकारी हैं, ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की कार्यशैली पर खुलेआम सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है।
इस पोस्ट ने जिलेभर में राजनीतिक हलचल मचा दी है और यह चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
पोस्ट में क्या लिखा गया?
भाजपा नेता ने अपनी सोशल मीडिया वॉल पर लिखा है—
“S.S.P. बदायूं की दृष्टि में रामेन्द्र सिंह S.O. फैजगंज वेंहटा से योग्य कोई नहीं। महीनों पहले हो चुका है तबादला, अब तक हैं चार्ज पर।”
यह पोस्ट सीधे-सीधे एसएसपी की कार्यशैली और थाना स्तर पर कार्यरत अधिकारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाती है।
कमेंट्स में उभरा जनता का आक्रोश
इस पोस्ट पर सौ से अधिक यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं, जिनमें से अधिकांश ने पुलिस व्यवस्था और भाजपा संगठन दोनों पर नाराज़गी जताई है।
कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं —
- एक यूजर ने लिखा: “कुछ न कहो, सभी सरकारों में जातियों का और रुपये का बोलबाला रहता है, जो नहीं बदलने की सोच है।”
- दूसरे ने लिखा: “नेता हुए पस्त, अधिकारी हुए मस्त। भाजपा का वोट बोरी भर के निकलेगा, कार्यकर्ताओं की कोई आवश्यकता नहीं। 8 वर्ष से सरकार में बूथ अध्यक्ष नहीं बन पाया।”
- तीसरे ने लिखा: “पुलिस से आम आदमी की क्या गिनती? खास आदमी भी बिना लेनदेन के जायज काम नहीं करा सकता।”
- एक और यूजर ने तो सीधे केंद्रीय मंत्री पर निशाना साधते हुए लिखा: “जितने भी अधिकारी रिश्वत ले रहे हैं, उसमें शत-प्रतिशत हाथ हमारे नेताओं का है। एक केंद्र के बड़े मंत्री जी ने तो अपने साले को इस काम पर लगा रखा है।”
इन तीखे और आक्रोशित कमेंट्स से साफ झलकता है कि भाजपा संगठन में अंदरूनी असंतोष गहराता जा रहा है, और जनता व कार्यकर्ताओं के बीच नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है।
पार्टी में गहराती गुटबाज़ी के कारण ही लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिका और नगर पंचायत मे मिल चुकी हैं हारें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर की यही गुटबाज़ी और आपसी खींचतान गत चुनावी नतीजों में स्पष्ट रूप से दिखी है।
बदायूं लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी की हार, वहीं विधानसभा की सहसवान, शेखुपुर और बिसौली सीटों पर पराजय, और फिर नगर पालिका एवं नगर पंचायत चुनावों में भाजपा की मज़बूत प्रमुख सीटों पर करारी हार– इसी अंदरूनी कलह का परिणाम मानी जा रही हैं।
पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि शीर्ष पदों पर बैठे नेता संगठन को मजबूत करने के बजाय सत्ता का सुख भोगने में व्यस्त हैं, जिससे कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
आने वाले चुनावों पर पड़ेगा असर?
पार्टी के अंदर बढ़ती यह रार अब आगामी पंचायत चुनावों में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। संगठन के निचले स्तर पर निराशा और असंतोष का माहौल है, और यह माना जा रहा है कि यदि नेतृत्व ने जल्द ही स्थिति को संभाला नहीं, तो इसका सीधा असर पार्टी के जनाधार पर पड़ेगा।
बदायूं में भाजपा नेता द्वारा सोशल मीडिया पर की गई यह पोस्ट अब संगठन के अंदरूनी मतभेदों की पोल खोलती दिखाई दे रही है।
जहाँ एक ओर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर का असंतोष आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।


























