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फैज़गंज नगर पंचायत में नियमों का मखौल: सफाईकर्मी को बना दिया लिपिक,जांच रिपोर्ट में खुली पोल,एडीएम ने जाँच कराकर पदोन्नति पर लगाई रोक,

  • सुर्खियों मे आया फैज़गंज वेहटा नगर पंचायत में बैकलॉग सफाईकर्मी की नियमविरुद्ध पदोन्नति का मामला,
  • जनप्रतिनिधि का नाम भी जांच के घेरे में, नाम लेने से बचते नजर आ रहे अधिकारी -सूत्र

बदायूं/फैज़गंज वेहटा। नगर पंचायत फैज़गंज वेहटा में एक बैकलॉग सफाईकर्मी को नियम विरुद्ध लिपिक (क्लर्क) बनाए जाने का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पदोन्नति पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में बिसौली के एक जनप्रतिनिधि का नाम भी सामने आया है, लेकिन जांच अधिकारी फिलहाल इसपर बोलने से बच रहे हैं।

मामला कैसे शुरू हुआ

जानकारी के अनुसार, फैज़गंज वेहटा नगर पंचायत के सभासद हरपाल सिंह ने इस प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में प्रभारी अधिशासी अधिकारी वेद प्रकाश यादव ने नियमों को दरकिनार करते हुए सफाईकर्मी सुमित की पदोन्नति की पत्रावली तैयार की और उसे लिपिक पद पर पदोन्नत कर दिया

शिकायत प्राप्त होते ही मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया, जिसके बाद अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने मामले की जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ कोषाधिकारी की दो सदस्यीय टीम गठित की थी।

जांच में खुलासा

जांच टीम ने रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्रावली और प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने पाया कि सफाईकर्मी सुमित की पदोन्नति नियमों के विरुद्ध की गई थी और इसके समर्थन में कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
जांच रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी प्रशासन को सौंपी गई, जिसमें साफ लिखा गया कि “पदोन्नति प्रक्रिया नियमानुसार नहीं की गई है और इसे तत्काल निरस्त किया जाए।

रिपोर्ट मिलते ही एडीएम प्रशासन ने पदोन्नति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए आगे की जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

जनप्रतिनिधि की भूमिका पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में अब एक जनप्रतिनिधि का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, यह पदोन्नति कथित तौर पर उसी जनप्रतिनिधि के इशारों पर की गई थी। हालांकि जांच अधिकारी इस बिंदु पर अभी तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि प्रभारी ईओ पर दबाव बनाकर पदोन्नति कराई गई थी, ताकि नगर पंचायत में मनचाहे कार्य कराये जा सकें,

अधिशासी अधिकारी का मूल कार्यस्थल बिल्सी

ध्यान देने योग्य है कि वेद प्रकाश यादव की मूल तैनाती नगर पालिका परिषद बिल्सी में है। उन्हें फैज़गंज नगर पंचायत का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसी दौरान यह पदोन्नति की गई, जिसने अब पूरे नगर पंचायत प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

एडीएम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि “जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।” साथ ही कहा गया कि नगर पंचायतों में नियमविरुद्ध पदोन्नतियों की अब जिलेभर में समीक्षा कराई जाएगी।

सवाल उठता है- आखिर कब रुकेगा नगर निकायों में नियमों का उल्लंघन?

नगर पंचायतों में इस तरह की नियुक्तियां और पदोन्नतियां नई नहीं हैं। सवाल यह है कि जब हर स्तर पर पारदर्शिता की बात की जाती है, तब ऐसे मामलों में स्थानीय दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप कैसे कायम रहता है?
फैज़गंज वेहटा का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो निकायों में भ्रष्टाचार और पक्षपात की जड़ें और गहरी हो जाएंगी।

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