स्वदेश केसरी की विशेष पड़ताल: क्या यह रिहाई स्थायी होगी या फिर कानूनी शिकंजा फिर कसेगा?

रामपुर/सीतापुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व सांसद आज़म खाँ आखिरकार 23 महीने बाद मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा हो गए। जेल के बाहर निकलते ही उनका वही पुराना अंदाज़ देखने को मिला—काला चश्मा, कलफ़दार सफेद कुर्ता और आत्मविश्वास से भरा व्यक्तित्व। बाहर आते ही उन्होंने सबसे पहले अपने दोनों बेटों को गले से लगाया। इस भावुक क्षण को देखने वाले समर्थकों की आंखें नम हो गईं।

आज़म खां की रिहाई पर गाड़ी ने खींचा ध्यान: बदायूं नंबर की इनोवा से लौटे रामपुर

जेल से बाहर आते वक्त उनकी सवारी बनी एक सफेद गाड़ी, जिसका रजिस्ट्रेशन बदायूं के उझानी कस्बे के मोहल्ला नारायणगंज निवासी एक युवक के नाम दर्ज बताई जा रही है। खास बात यह है कि सपा नेता आज़म ख़ां की रिहाई के बाद उनके काफिले में शामिल गाड़ियों में से एक खास गाड़ी ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी। दरअसल, सीतापुर जेल से रामपुर तक आज़म ख़ां और उनके बेटे अब्दुल्ला जिस इनोवा क्रिस्टा कार से सफर कर रहे थे, वह बदायूं नंबर (UP-24) की थी। आज़म के काफिले की बाकी गाड़ियां रामपुर नंबर की थीं, लेकिन बदायूं की इस गाड़ी का शामिल होना राजनीतिक हलकों में नए कयासों को हवा दे रहा है। माना जा रहा है कि यह गाड़ी आज़म खां के बदायूं में करीबी रहे एक पूर्व विधायक से जुड़ी हुई है।गाड़ी के नंबर की चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक ज़ोरों पर है।

अखिलेश यादव का ऐलान, लेकिन सूत्रों के दावे अलग

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आज़म खाँ की रिहाई पर कहा कि “सपा सरकार बनने पर आज़म साहब पर लगे सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।” लेकिन, राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक रिहाई के पीछे सत्ता पक्ष की नर्मी भी है, और यह शर्त रखी गई है कि आज़म खाँ भविष्य में सपा के साथ चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनसे यह दबाव बनाया जा रहा है कि या तो वे अपनी पार्टी बनाएं या फिर बसपा का दामन थाम लें।

अब यह अटकलें कितनी सच्ची साबित होती हैं, यह आने वाला वक्त बताएगा। मगर इतना तय है कि सपा और आज़म खाँ के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे।

आजम की कानूनी उलझनें—81 केस अभी भी लंबित

आजम खान पर 104 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से 93 केवल रामपुर में।

  • अब तक 12 मामलों में फैसला आया है—कुछ में बरी, तो कुछ में सजा।
  • अभी भी 81 मुकदमे पेंडिंग हैं।
  • इनमें 59 मजिस्ट्रेट कोर्ट, 19 सेशन कोर्ट और 3 जिला अदालत में विचाराधीन हैं।

इन मामलों में जमीन कब्जा, दस्तावेजों में हेराफेरी, लूट, भैंस-बकरी चोरी तक के गंभीर आरोप शामिल हैं। हाल ही में क्वालिटी बार की जमीन कब्जाने के केस में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।

सबसे बड़ा खतरा अब्दुल्ला आज़म के जन्म प्रमाण पत्र प्रकरण का है, जिसमें आज़म को 7 साल की सजा हो चुकी है और अपील पर मामला चल रहा है। इसके अलावा पासपोर्ट और पैन कार्ड से जुड़े केसों में भी फैसला जल्द आ सकता है।

परिवार पर भी कानूनी शिकंजा

आज़म खाँ ही नहीं, पूरा परिवार मामलों में उलझा हुआ है—

  • पत्नी तंजीम फातिमा पर 35 केस।
  • बेटे अब्दुल्ला आज़म पर 43 केस।
  • बड़े बेटे अदीब पर 20 केस।
    यानि पूरे परिवार पर करीब पौने दो सौ मामले।

2017 के बाद से लगातार गिरावट

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक वक्त आज़म खाँ की तूती बोला करती थी। लेकिन 2017 में योगी सरकार आने के बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ।

  • फरवरी 2020: पहली बार गिरफ्तारी, बाद में सुरक्षा कारणों से सीतापुर जेल भेजे गए।
  • 27 महीने जेल में रहने के बाद मई 2022 में जमानत पर बाहर आए।
  • अक्टूबर 2023: अब्दुल्ला आज़म के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में दोबारा जेल गए।
  • और अब, 23 महीने बाद फिर से जेल से बाहर।

242 किमी का शक्ति प्रदर्शन, लेकिन आगे का रास्ता कठिन

आजम खान की सीतापुर से रामपुर तक की वापसी को समर्थकों ने 242 किलोमीटर लंबा शक्ति प्रदर्शन बना दिया। हर कस्बे, हर चौराहे पर समर्थकों की भीड़ उमड़ी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह रिहाई लंबे वक्त तक कायम रहेगी?

क्योंकि 81 लंबित मुकदमे और कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच किसी भी मामले में फैसला आने पर फिर से जेल का खतरा मंडरा सकता है।

स्वदेश केसरी की पड़ताल

आजम खाँ की रिहाई से यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ समर्थक जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक समीकरण नए मोड़ ले रहे हैं।

  • क्या वे सपा के साथ बने रहेंगे?
  • क्या नई पार्टी बनाएंगे?
  • या फिर बसपा का दामन थामेंगे?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि आज़म खाँ की रिहाई ने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

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