बदायूं, 25 जून: उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बीते दिन बिल्सी क्षेत्र के दिधोनी के पास सड़क दुर्घटना में घायल हुए मोर की आज मृत्यु हो गई। परंतु इससे भी अधिक चिंताजनक और निंदनीय बात यह रही कि वन विभाग और पशुपालन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी के साथ संवैधानिक सम्मान और वैज्ञानिक प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, घायल मोर को 112 डायल पुलिस की सूचना पर वन विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे और मोर को एक कट्टे में भरकर ले गए। पशु को तुरंत किसी विशेषज्ञ केंद्र, जैसे बरेली स्थित IVRI, भेजने के बजाय, सहसवान के ब्लॉक स्तर पर तैनात पशु चिकित्सक कर्मवीर से उसका स्थानीय पोस्टमॉर्टम करवा दिया गया। इसके बाद मोर को बिना किसी राष्ट्रीय सम्मान या प्रक्रिया के दफना दिया गया।
यह केवल लापरवाही नहीं, यह राष्ट्रीय अपमान है
यह घटना सिर्फ एक मोर की मौत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक की गरिमा और संविधान की भावना के साथ की गई घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता है। मोर कोई आम पक्षी नहीं, हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी है, जिसकी रक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी वन विभाग और पशुपालन विभाग की है।
जैसे घायल या मृत हिरन या तेंदुए जैसे वन्यजीवों को विशेष संस्थानों में भेजकर जांच की जाती है, वैसे ही मोर के मामले में भी बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) भेजना जरूरी था, जहां गहन फॉरेंसिक जांच और डीएनए परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन जानबूझकर इसकी अनदेखी की गई।
प्रशासन से उठी सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना को लेकर पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा रोष है। बदायूं के पशुप्रेमी विकेंद्र शर्मा ने इस मामले की जानकारी “स्वदेश केसरी न्यूज़” को देते हुए बताया कि यह कोरी लापरवाही नहीं, बल्कि विभागीय उदासीनता और जिम्मेदारी से भागने का ज्वलंत उदाहरण है।
उन्होंने मांग की है कि वन विभाग व पशुपालन विभाग के जिन कर्मचारियों ने इस पूरे मामले में प्रोटोकॉल और संवैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी की, उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
पुरानी घटनाओं की भी उठी जांच की मांग
यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में बिसौली रेंज में एक हिरन की मौत और कोल्हाई नर्सरी में हिरन के अवशेष मिलने जैसे मामलों में भी वन विभाग ने कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की थी। ऐसे में यह स्पष्ट है कि विभागीय लापरवाही सुनियोजित चुप्पी बन चुकी है।
मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से संज्ञान लेने की अपील
जनता और जागरूक नागरिकों की ओर से मांग की जा रही है कि इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रमुख सचिव (वन एवं पर्यावरण) और जिलाधिकारी बदायूं को स्वयं संज्ञान लेकर दोषियों को दंडित करें, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी इस प्रकार की राष्ट्रीय अस्मिता और वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी से मुंह न मोड़े।
यह केवल एक खबर नहीं, राष्ट्रीय चेतना का सवाल है।
मोर के सम्मान के साथ किया गया यह व्यवहार आने वाले समय में सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता की कसौटी बनेगा।


























