बदायूं: किशोर न्याय बोर्ड, बदायूं ने न्याय के साथ संवेदनशीलता और सुधारवादी दृष्टिकोण की अनूठी मिसाल पेश की है। बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट रोहिणी उपाध्याय, सदस्य अरविंद गुप्ता और प्रमिला गुप्ता की न्यायिक पीठ ने एक किशोरी के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे सजा के बजाय समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
किशोरी से लिया शुभ संकल्पों का वायदा
वर्ष 2017 में भारतीय दंड संहिता की धारा 323/504/324 के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी किशोरी की उम्र उस समय मात्र 7 वर्ष 11 माह थी। जब उससे इस बारे में पूछा गया तो उसे घटना ठीक से याद भी नहीं थी। लेकिन होली के शुभ अवसर पर उसने समाज और राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा जाहिर की।
बोर्ड ने इस पर सहानुभूति जताते हुए उसे कोई सजा न देकर प्रेरित करने का फैसला किया। उसे भविष्य में कोई भी अपराध न करने की चेतावनी देते हुए मामला निस्तारित कर दिया गया।
न्याय के साथ सुधार की पहल
इस दौरान बोर्ड में मौजूद स्टेनो विजय शर्मा, पेशकार कमल कांत, कोर्ट मोहरीर मोहजिम खान, अधिवक्ता और अभिभावकों ने भी न्यायिक पीठ के इस फैसले का स्वागत किया। सभी ने किशोरी को होली की शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि होली का यह रंग उसके जीवन में नई खुशियां और सकारात्मकता लाएगा।
बदायूं किशोर न्याय बोर्ड का यह निर्णय संवेदनशील न्याय की मिसाल बन गया है, जिसमें दंड के बजाय सुधार को प्राथमिकता दी गई।


























