

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावास का उद्घाटन हुए 25 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी यह छात्रावास अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। छात्रों के लिए निशुल्क आवास की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाए गए इस छात्रावास की ओर न तो प्रशासन ने ध्यान दिया, न ही जनप्रतिनिधियों ने।
वार्डन की नियुक्ति न होने से छात्र बेहाल
छात्रावास में लंबे समय से वार्डन की नियुक्ति नहीं हुई है, जिससे यहां रह रहे छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अनाधिकृत रूप से बाहरी लोग भी कमरों में कब्जा जमाए हुए हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव, प्रशासन लापरवाह
छात्रावास में पीने के पानी के लिए लगाया गया हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा है। साफ-सफाई न होने से दुर्गंध भरा माहौल बना रहता है, जिससे छात्रों को रहना मुश्किल हो रहा है। सुपरवाइजर नाम मात्र के लिए नियुक्त है, जो कभी-कभार औपचारिकता निभाने आ जाता है।
जनप्रतिनिधियों की बेरुखी, कोई सुध लेने वाला नहीं
बिल्डिंग की दुर्दशा देखकर यह साफ झलकता है कि यह छात्रावास प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का शिकार है। 2000 में जब इसका उद्घाटन हुआ था, तब इसे अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा गया था, लेकिन आज इसकी हालत जर्जर हो चुकी है।
छात्रावास नगर के मुख्य तहसील रोड पर स्थित है, लेकिन किसी भी विधायक, सांसद या प्रशासनिक अधिकारी ने इसकी दुर्दशा पर ध्यान नहीं दिया। सवाल यह उठता है कि अगर सरकारी योजनाएं केवल उद्घाटन तक ही सीमित रहेंगी, तो जरूरतमंदों को उनका लाभ कैसे मिलेगा? क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर कोई संज्ञान लेंगे या इसे यूं ही खस्ताहाल छोड़ देंगे?


























