बदायूं। जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत नई सराय और मालवीय गंज चौकी क्षेत्र में गौवंश के साथ अमानवीयता की कई घटनायें सामने आई है। क्षेत्र में तेजाब फेंककर गौवंश को घायल करने के मामले ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। वर्तमान में चार घायल नंदी का इलाज स्थानीय पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा के संस्थान द्वारा किया जा रहा है।



प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
घटना ने न केवल पशु प्रेमियों, बल्कि स्थानीय जनता को भी झकझोर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब गौवंश पर इस प्रकार की क्रूरता की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जहां निर्दोष गौवंश पर अत्याचार की सारी हदें पार की गईं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से इन घटनाओं को रोकने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पशु प्रेमियों का संघर्ष
घायल गौवंश का इलाज कर रहे पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने बताया कि “घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन और शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। हर बार हमें अपने स्तर पर प्रयास करना पड़ता है, लेकिन अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।” उन्होंने शासन-प्रशासन से अपील की है कि गौवंश की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
स्थानीय जनता में आक्रोश
नई सराय और मालवीय गंज के निवासियों ने इन घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि गौवंश हमारी संस्कृति और पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन इनके साथ हो रही अमानवीयता निंदनीय है। एक स्थानीय निवासी ने कहा “तेजाब फेंककर निर्दोष पशुओं को तड़पाना इंसानियत के खिलाफ है,” ।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
क्षेत्र में गौवंश पर क्रूरता के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी और कार्रवाई की कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों ने जिला प्रशासन से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है।
आवश्यक कार्रवाई की मांग
पशु प्रेमियों और स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से तेजाब हमलों की घटनाओं की तुरंत जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि क्षेत्र में गौवंश की सुरक्षा के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाए।
गौवंश पर तेजाब फेंकने जैसी अमानवीय घटनाएं न केवल समाज में बढ़ते अपराध को दर्शाती हैं, बल्कि प्रशासन की उदासीनता पर भी सवाल खड़े करती हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं। आखिर कब तक गौवंश को इस प्रकार की क्रूरता का शिकार होना पड़ेगा?

























