बिल्सी।श्री माहेश्वरी भवन में रामकृष्ण समिति द्वारा आयोजित 10 दिवसीय राम कथा का आज भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर धार्मिक आयोजन के साथ एक काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक संत शिरोमणि अयोध्या दास रामायणी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को नैतिक मूल्यों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सत्य, क्षमा, और बड़ों की सेवा का फल मानव जीवन में अवश्य मिलता है, इसलिए मानव को इन मूल्यों को अपनाने में कभी भी संकोच नहीं करना चाहिए।



स्वामी जी ने राम नाम के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब हम राम नाम का जप करते हैं, तब हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
समापन से पूर्व कथा स्थल पर 24 घंटे का राम नाम का जाप पाठ किया गया, जो कल सुबह 9 बजे से शुरू होकर आज सुबह 9 बजे समाप्त हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से जाप में भाग लिया, जिससे वातावरण भक्ति से गूंज उठा।
कथा विसर्जन के बाद स्वामी जी के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में प्रख्यात गीतकार नरेंद्र मोहन गरल ने कई भावपूर्ण पंक्तियों के साथ अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं,
“चाहे जितने वाहन रख लो,
कंधों पर ही जाना है।
दरवाजे पर खड़ी हुई सब कारें,
धरी रह जाएंगी।”
इन पंक्तियों ने उपस्थित भक्तों को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद कवि आशीष वशिष्ठ सुवीन माहेश्वरी ने भी स्वामी जी के सम्मान में काव्य पाठ किया और अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति का रस घोल दिया।
कार्यक्रम के अंत में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिसके बाद भगवान राम की आरती उतारी गई। सभी भक्तों ने श्रद्धा से आरती में भाग लिया। अंत में, प्रसाद वितरण का कार्यक्रम हुआ, जिसमें प्रतिष्ठित गल्ला एवं कोल्ड स्टोरेज व्यापारी मनीष पाल वार्ष्णेय ने प्रसाद वितरित किया।
इस अवसर पर सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के महंत पं श्री मटरू मल शर्मा महाराज का सम्मान भी किया गया। समिति के सदस्यों ने उन्हें राम नाम का पटका पहनाकर उनका आभार व्यक्त किया।
रामकृष्ण समिति के सदस्यों मनोज वार्ष्णेय, नीरज वार्ष्णेय, चंद्रपाल तोषनीवाल, दुर्गेश वार्ष्णेय, सतपाल वार्ष्णेय, लोकेश वार्ष्णेय, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश वार्ष्णेय और डीडी ने उपस्थित श्रद्धालु भक्तों का तहे दिल से आभार व्यक्त किया, उनके सहयोग और उपस्थिति के लिए।इस धार्मिक आयोजन ने सभी को एकत्रित किया और भक्ति के अद्वितीय अनुभव का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान किया। सभी ने मिलकर भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त किया।

























