
ईवीएम (प्रतीकात्मक)
विस्तार
गठबंधन की सियासत में पहली बार बरेली मंडल की पांच सीटों सहित लखीमपुर खीरी व धौरहरा लोकसभा पर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में हाथ का सिंबल नहीं होगा। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब कांग्रेस प्रत्यक्ष तौर पर इन सीटों पर चुनावी मैदान में नहीं है। बरेली मंडल की पांचों और खीरी की दो लोकसभा सीटों पर गठबंधन के तहत सपा के उम्मीदवार ताल ठोंक रहे हैं।
ऐसे में यहां सपा के साथ कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरी ताकत से जुटे हैं। बरेली मंडल की सभी लोकसभा सीट पर आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा था। वर्ष 2009 में अंतिम बार बरेली और धौरहरा सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद कांग्रेस का जनाधार भी लगातार कम होता गया है।
बदायूं में पांच चुनाव जीती कांग्रेस
बदायूं लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने पांच बार चुनाव जीतकर सबसे ज्यादा समय तक कब्जा जमाने का रिकाॅर्ड भी बनाया। आजादी के बाद हुए चुनाव में पार्टी लगातार दो बार जीती। यहां वर्ष 1984 में अंतिम बार कांग्रेस जीती थी। बाद में सांसद सलीम इकबाल शेरवानी ने अगला चुनाव समाजवादी पार्टी के सिंबल पर लड़ा था। इसके बाद कांग्रेस यहां नहीं लौट पाई।
बरेली में आठ बार हाथ को मिला जनता का साथ
बरेली लोकसभा सीट पर आजादी के बाद कांग्रेस ने आठ बार जीत दर्ज की। यहां कांग्रेस के सतीश चंद्र पहले सांसद बने और दो कार्यकाल पूरे किए। वर्ष 1971 में कांग्रेस ने यहां वापसी की, मगर इमजरेंसी के बाद बदले हालात में सीट जनता पाटी के खाते में चली गई। वर्ष 1981 और 1984 में कांग्रेस की बेगम आबिदा अहमद दिल्ली पहुंची थीं। यहां अंतिम बार वर्ष 2009 में कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन ने जीत दर्ज की थी।

























