
इश्तियाक अहमद
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पाकिस्तानी मूल के स्वीडिश राजनीति शास्त्री प्रो. इश्तियाक अहमद ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना विभाजन के बाद पूरे पंजाब और बंगाल को पाकिस्तान में चाहते थे लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो सकी। जिन्ना पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ देशों में रखना चाहते थे इसलिए ब्रिटिश सेना ने भी भारत विभाजन को समर्थन दिया। भारत के विभाजन के लिए जिन्ना से अधिक तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण थी। यदि ब्रिटिश चाहते तो भारत विभाजन रुक सकता था।
वह बुधवार को बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र एवं अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित दो दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान शृंखला को संबोधित कर रहे थे। जिन्ना द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत और भारत का विभाजन विषयक व्याख्यान में प्रो. इश्तियाक अहमद ने कहा कि महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन पर जिन्ना ने उनके स्वागत सभा में स्वागत भाषण पढ़ा था। गांधी जी उससे प्रभावित हुए थे पर आगे चलकर गांधी के विचारों से जिन्ना की सहमति नहीं बन पाई।
1935 के अधिनियम के बाद से ब्रिटिश राज्य ने कांग्रेस की बढ़ती हुई शक्ति को कम करने के लिए जिन्ना और मुस्लिम लीग की विभाजनकारी नीति और सांप्रदायिक विचारधारा को बढ़ावा दिया। 1930 के बाद से अल्लामा इकबाल और चौधरी रहमत अली ने मुस्लिम बहुल राज्य की आवश्यकता पर जोर दिया जिसे जिन्ना ने द्विराष्ट्रवाद के विचार के रूप में आगे बढ़ाया। आगे चलकर वायसराय लॉर्ड लिनीलिथगो ने यह माना कि भारत में ब्रिटिश सत्ता को बनाए रखने के लिए हमें कांग्रेस को कमजोर करना होगा और जिन्ना को समर्थन देना होगा।

























