
यूपी कैबिनेट विस्तार
– फोटो : अमर उजाला/सोनू कुमार
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उत्तर प्रदेश में आखिरकार बहुप्रतीक्षित योगी मंत्रिमंडल का विस्तार मंगलवार शाम को हो गया। इस मंत्रिमंडल में ओमप्रकाश राजभर से लेकर दारा सिंह चौहान और अनिल कुमार से लेकर सुनील शर्मा को मंत्री बनाया गया है। खास बात यह है कि चार मंत्रियों में तीन मंत्री ऐसे हैं जिनकी ‘सियासी पाठशाला’ बहुजन समाज पार्टी रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी में कभी मजबूत पिलर माने जाने वाले इन नेताओं से भाजपा ने सिर्फ बसपा के कोर वोट बैंक में मजबूत सेंधमारी की तैयारी ही नहीं की है, बल्कि पिछड़ों, ब्राह्मण और दलितों को भी आने वाले लोकसभा चुनाव के नजरिए से साधा है। इन चार मंत्रियों के साथ पश्चिम से पूरब की सियासत भी साधी गई है।
मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर होली त्योहार न मनाने की धमकी देने वाले ओमप्रकाश राजभर को योगी मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। सियासी जानकार और वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि ओमप्रकाश राजभर से लेकर दारा सिंह चौहान और अनिल कुमार समेत सुनील शर्मा मंत्री बने हैं। इसमें सुनील शर्मा तो भारतीय जनता पार्टी के राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए नेता हैं। लेकिन बाकी तीन नेता जो मंत्री बनाए गए हैं, उनकी सियासी पाठशाला बहुजन समाज पार्टी ही रही है। शुक्ल कहते हैं कि यह बात अलग है कि बाद में यह नेता अलग-अलग पार्टी में सफर करते हुए आगे बढ़े। लेकिन बाद में बहुजन समाज पार्टी में काशीराम और मायावती के आंदोलन को करीब से समझा है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने इन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर न सिर्फ बहुजन समाज पार्टी के कोर वोट बैंक में सेंधमारी करने का बड़ा पॉलिटिकल शॉट लगाया है, बल्कि इन नेताओं के अपने वोट बैंक के माध्यम से भी बड़ी सियासी पिच आगे बढ़ाई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चार नए मंत्रियों के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बड़ा सियासी ताना-बाना बुना है। बृजेंद्र कहते हैं कि चार नए मंत्रियों में दो ओबीसी, एक दलित और एक ब्राह्मण चेहरा शामिल किया गया है। इसके अलावा यह सभी चेहरे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं। ओमप्रकाश राजभर जहां पूर्वांचल में पिछड़ों खासकर राजभर समुदाय के वोट बैंक पर दावा करते हैं। वहीं दारा सिंह चौहान का भी पूरब में पिछड़ों के नेता होने का बड़ा दावा है। राजनैतिक विश्लेषक नासिर सिद्दीकी कहते हैं कि दारासिंह चौहान पिछड़ों के नोनिया समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश में इस समुदाय का तकरीबन तीन फीसदी वोट बैंक माना जाता है। इसी तरह अनिल कुमार को मंत्रिमंडल में शामिल कर दलितों खासकर जाटव को अपने पाले में करने का बड़ा दांव चला है। सियासी जानकारों का मानना है कि दलितों में अभी भी जाटव बसपा का कोर वोट बैंक हैं। अनिल कुमार के मंत्री बनने से भाजपा को फायदा दिख रहा है।

























