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Delhi Kisan Andolan Viral Video Reality; Shambhu Border | Farmers Protest | क्या नकली किसानों को पगड़ी पहनाकर आंदोलन में लाए: आंदोलनकारी बोले सिख विद्रोह कर दें तो पाक को दिल्ली आने में 10 मिनट लगेंगे; जानिए इन VIDEOS का सच

1 घंटे पहले

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किसान आज दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए शंभू बॉर्डर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। इस बीच किसान आंदोलन से जुड़े दो दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

  • पहला दावा : किसान आंदोलन में कलाकारों को पगड़ी पहना कर लाया जा रहा है।
  • दूसरा दावा: रिटायर्ड सैनिकों ने किसान आंदोलन में कहा अगर भारतीय सेना के हमारे सिख लड़के विद्रोह कर किसानों के साथ शामिल हो जाएं तो पाकिस्तान को दिल्ली पहुंचने में 10 मिनट लगेंगे।

हमारी पड़ताल में दोनों ही दावे गलत और भ्रामक निकले।

पहले दावे की पड़ताल…

वेरिफाइड एक्स यूजर शिवांगी मिश्रा ने ट्वीट किया- वीडियो भले पुराना है पर असलियत आज भी झलकती है, शूटिंग के दौरान सेट पर जाने से पहले सब कलाकार तैयार हो रहे हैं!! (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

वायरल दावे से जुड़ा दूसरा ट्वीट हमें ‘मनीष कश्यप सन ऑफ बिहार‘ नाम के एक्स अकाउंट पर मिला। इस ट्वीट में लिखा था- हिंदुओ जमकर “Repost” करें जिससे इस फर्जी किसान आंदोलन का पर्दा फाश हो जाए। फर्जी रोहिंग्या, पाकिस्तानी मुस्लिमो को पगडी पहनाकर देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

सटायर ओझा सर नाम के एक वेरिफाइड एक्स यूजर ने भी वायरल दावे से जुड़ा ट्वीट किया और लिखा – इस किसान आंदोलन में सभी एंटीनेशनल फर्जी लोग शामिल हुए हैं। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

वहीं, खुद को मोदी समर्थक बताने वाले जितेंद्र प्रताप सिंह अपने ट्वीट में लिखते हैं- देखिए किसान आंदोलन में कौन लोग हैं ज्यादातर तबलीगी जमात के मौलाना हैं जो सरदार जी वाली पगड़ी पहन कर दंगा और हल्ला मचा रहे हैं। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

और सच क्या ?

दावे की पड़ताल के लिए हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को गूगल इमेज पर रिवर्स सर्च किया। साथ ही वीडियो पर लिखे टेक्स्ट को भी हिंदी में ट्रांसलेट लिया।

  • पंजाबी में लिखे टेक्स्ट को जब हिंदी में अनुवाद किया तो पता चला यह वीडियो चर्चित पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के अंतिम अरदास के समय लगाए गए दस्तार लंगर का था। जहां, हिंदू, मुस्लिम समेत अन्य धर्मों के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था और मूसेवाला को श्रद्धांजली देने के लिए पग (पगड़ी) पहनी थी।
  • वीडियो को जूम करके देखने पर इसमें पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का पोस्टर भी दिखाई देता है।
  • पड़ताल के दौरान यह वीडियो हमें मनजिंदर सिंह नाम के एक फेसबुक यूजर के पेज पर मिला। वीडियो को 10 जून 2022 को अपलोड किया गया था। वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा था – सिद्धू मूसेवाला की अंतिम अरदास के दौरान हिंदू-मुस्लिम वीरों ने भी पगड़ी सजाई (पहनी) और कई वीरों ने प्रण लिया कि हम भी पगड़ी सजाएंगे (पहनेंगे)।

देखें वीडियो :

स्पष्ट है कि जिस वीडियो को किसान आंदोलन से जुड़ा बताया जा रहा है असल में वो वहां का है ही नहीं। वीडियो पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के अंतिम अरदास के समय का था। ऐसे में किसान आंदोलन में कलाकारों को लाने का दावा पूरी तरह से गलत है।

दूसरे दावे की पड़ताल…

वेरिफाइड एक्स यूजर अनुपम मिश्रा ने ट्वीट किया – यदि भारतीय सेना में हमारे सिख नौजवानों ने विद्रोह कर दिया तो पाकिस्तान को दिल्ली पहुंचने में सिर्फ 10 मिनट लगेगा, ये हैं “अन्नदाता”। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट :

हरीश माली नाम के वेरिफाइड एक्स यूजर ने अपने ट्वीट में लिखा – ये आपको किस एंगल से किसान लग रहें हैं… ‘अगर भारतीय सेना में हमारे सिख लड़के विद्रोह कर किसानों के साथ शामिल हो जाएं तो पाकिस्तान को दिल्ली पहुंचने में 10 मिनट लगेंगे’। भारतीय सेना की छवि और देशभक्ति को धूमिल करना गद्दारी की पराकाष्ठा होनी चाहिए। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

वहीं, जितेंद्र प्रताप सिंह ने वायरल वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा- क्या यह किसान विरोध है या आतंकवाद या सेना में विद्रोह की साजिश एक सिख किसान जो आर्मी यूनिफॉर्म में है उसने चेतावनी दी, “अगर भारतीय सेना में हमारे सिख लड़के विद्रोह करते हैं और किसानों में शामिल हो जाते हैं तो पाकिस्तान को दिल्ली पहुंचने में 10 मिनट लगेंगे”। (अर्काइव ट्वीट)

देखें ट्वीट:

और सच क्या ?

दावे की पड़ताल के लिए हमने वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को गूगल इमेज पर रिवर्स सर्च किया। साथ ही कीवर्ड्स की मदद से गूगल पर ओपन सर्च कर मामले का सच जानने का प्रयास किया।

जांच के दौरान हमें मिनी टीवी9 नाम के एक फेसबुक पेज पर यह वीडियो मिला। इस वीडियो को 30 जनवरी 2021 को अपलोड किया गया था।

देखें वीडियो :

यहां तक एक बात बहुत स्पष्ट है कि यह वीडियो साल 2024 के किसान आंदोलन का नहीं है। ऐसे में वीडियो का सच जानने के लिए हमने हमने गूगल पर कीवर्ड्स की मदद से ओपन सर्चिंग की तब इंडिया टुडे का एक आर्टिकल मिला।

इंडिया टुडे में प्रकाशित आर्टिकल का स्क्रीनशॉट।

इंडिया टुडे में प्रकाशित आर्टिकल का स्क्रीनशॉट।

  • यह आर्टिकल 20 जनवरी 2021 को प्रकाशित किया गया था। आर्टिकल में लिखा था कि सेना की वर्दी पहनकर किसान आंदोलन में आए कुछ रिटायर्ड सैनिकों के वीडियो वायरल होने के बाद सेना ने रिटायर्ड सैनिकों से कहा था कि वे सेना की वर्दी और मेडल्स पहनकर किसान आंदोलन में भाग नहीं लें।

साफ है कि जिस वीडियो को हालिया किसान आंदोलन का बताकर वायरल किया जा रहा है वो अभी का नहीं बल्कि साल 2021 का है। ऐसे में वीडियो के अभी के किसान आंदोलन के होने का दावा भ्रामक है।

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