

कानपुर में पुलिस कॉन्स्टेबल का दागदार चेहरा एक बार फिर सामने आया है। एंटी करप्शन विंग ने करोड़पति कॉन्स्टेबल को ट्रेस किया। जब अफसर उसकी कोठी पहुंचे, तो कंपाउंड में ऑडी, BMW और फॉर्च्यूनर जैसी कारें मिली हैं। सिर्फ बंगले की कीमत 5 करोड़ से ज्यादा एंटी करप्शन के अफसरों ने अपनी रिपोर्ट में कॉन्स्टेबल के बंगले की कीमत महज 1.5 करोड़ रुपए आंकी है। लेकिन ग्राउंड रियलिटी में सामने आया कि श्याम नगर डी-ब्लॉक के जिस मोहल्ले में कांस्टेबल का मकान है, सिर्फ उस जमीन की कीमत दो-ढाई करोड़ से ज्यादा है। बंगले की कीमत 5 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि कई करोड़ की तो उसके पास बेनामी संपत्तियां हैं। जिसका कोई हिसाब किताब उसके पास नहीं है।
छानबीन में सामने आया कि कॉन्स्टेबल के पास श्यामनगर में आलीशान बंगला, लग्जरी गाड़ियां, घर के अंदर लग्जरी सुविधाएं मौजूद थीं। उसकी हर गाड़ी के आखिरी 4 अंक 0078 हैं। टीम से उसके पड़ोसियों ने बताया कि जब भी कोई नई गाड़ी लॉन्च होती तो सबसे पहले कॉन्स्टेबल के काफिले में शामिल होती थी।
खबर विस्तार से
1987 में सिपाही पद पर भर्ती होने वाला सिपाही श्याम सुशील मिश्रा मूल रूप से मिर्जापुर के ग्राम भैंसा का रहने वाला था। वर्तमान में वह चकेरी थानाक्षेत्र के डी ब्लॉक श्यामनगर में रह रहा है। श्याम लंबे समय तक भ्रष्टाचार निवारण संगठन में कार्यरत था।
कानपुर चकेरी में रहने वाले बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड में गिरफ्तार होने के बाद हुई विभागीय जांच के बाद उसे दिसंबर 2022 में बर्खास्त कर दिया गया था।पिंटू सेंगर की 20 जून 2020 की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जमीन के विवाद में भू-माफिया पप्पू स्मार्ट, सउद अख्तर समेत अन्य के साथ मिलकर पिंटू सेंगर की हत्या करा दी थी। जघन्य हत्याकांड के बाद कॉन्स्टेबल सुशील मिश्रा का एक ऑडियो सामने आया था। जिसमें सुशील बोल रहा था कि पिंटू सेंगर का मर्डर होने वाला है।इससे जितनी भी रकम बकाया हो ले लेना। इसके बाद जांच शुरू हुई तब सामने आया कि कॉन्स्टेबल भी मर्डर केस में शामिल था। इसके बाद उसे अरेस्ट करके जेल भेज दिया गया था। उस समय वह उन्नाव में तैनात था। उसे बर्खास्त भी कर दिया गया। अब वह जेल से जमानत पर बाहर है।
रमाकांत पांडेय नाम के व्यक्ति ने उसके खिलाफ 2019 में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत लखनऊ में की थी जिसके बाद उसके खिलाफ शासन ने आय से अधिक संपत्ति की जांच के आदेश दिए थे। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की कानपुर इकाई के इंस्पेक्टर चतुर सिंह ने करीब 4 साल तक मामले की जांच की।जांच में पाया कि 2007 से 2018 के बीच उसने ज्ञात एवं वैध स्रोतों से हुई आय के मुकाबले 60 प्रतिशत ज्यादा खर्च किया। आय और व्यय के बीच करीब 3.11 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया।प्रारंभिक जांच में साक्ष्य मिलने के बाद अब पूरी कुंडली खंगालनी शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान श्याम मिश्रा ने कोई सहयोग भी नहीं किया और न ही बयान दर्ज कराए।
पिंटू की हत्या कराने में 10 लाख देने का भी आरोप
प्रापर्टी डीलर व बसपा नेता पिंटू सेंगर का श्याम सुशील मिश्रा करीबी था। सूत्रों के अनुसार पुलिस की जांच में सामने आया था कि दोनों पार्टनरशिप में जमीनें खरीदने-बेचने का काम करते थे। आरोप है कि जब एक संपत्ति को लेकर पिंटू से विवाद हुआ तो उसने हत्या के लिए पप्पू स्मार्ट को 10 लाख रुपये दिए। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। फिलहाल उस मामले में वह जमानत पर बाहर है।
भू-माफियाओं के साथ पार्टनरशिप कर बना करोड़पति
श्याम सुशील मिश्रा ने भू-माफिया पप्पू स्मार्ट, सउद अख्तर समेत अन्य के साथ साठगांठ करके प्रॉपर्टी का काम शुरू किया था। प्रॉपर्टी का काम उसे इस कदर रास आया कि नौकरी को ताक पर रखकर प्रॉपर्टी के धंधे में कूद गया। कानपुर से लेकर उन्नाव और लखनऊ में कई सोसायटी बनाकर बसाई। बड़े-बड़े बिल्डरों का पार्टनर बन गया। भले ही कहने को वह कॉन्स्टेबल था। कांस्टेबल की तनख्वाह से कई गुना ज्यादा तो वो सिर्फ अपने नौकरों को सैलरी देता था।

























