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पूर्व मंत्री आबिद रज़ा सपा से फिर ठगे गये, लगाई धोखे की हैट्रिक, आंवला लोकसभा से नही दिया टिकट,गुरु चेले की सपा में नहीं गली दाल,

बदायूं। सोमवार को समाजवादी पार्टी ने 11 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। जिसमें आंवला लोकसभा क्षेत्र से नीरज मोर्य को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है।आंवला क्षेत्र से प्रत्याशी की घोषणा होने के बाद से बदायूं की सियासत मे घमासान मचा हुआ है। वजह है कि आंवला लोकसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री आबिद रज़ा चुनाव की तैयारी में लगे थे। लेकिन समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री आबिद रज़ा को प्रत्याशी नही बनाकर आबिद रज़ा की क्षेत्र में की गई मेहनत के साथ साथ उनके समर्थकों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। भले ही अभी तक पूर्व मंत्री आबिद रज़ा की ओर से कोई ब्यान नही आया है, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि पूर्व मंत्री आबिद रज़ा को बार बार धोखा देना समाजवादी पार्टी को बदायूं के अलावा और कई जगहों पर भी नुकसान पहुंचेगा। सियासी बाजार में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री आबिद रज़ा के साथ धोखे की हैट्रिक लगा दी है, अब पूर्व मंत्री आबिद रज़ा कौनसा पैतरा इस्तेमाल करते हैं, यह तो उनके बयान के आने के बाद ही मालूम होगा।

2019 लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद सलीम शेरवानी ने सपा से टिकट नही मिलने पर कांग्रेस से चुनाव लडकर समाजवादी पार्टी प्रत्याशी को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रविवार को पूर्व सांसद सलीम शेरवानी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। सोमवार को 11 प्रत्याशियों की सूची जारी हो जाने से पूर्व मंत्री आबिद रज़ा का भी पार्टी छोड़ना तय माना जा रहा है, हालांकि पूर्व मंत्री आबिद रज़ा की ओर से अभी तक ऐसा कोई बयान नही आया है। आज के नये हालातों को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव मे समाजवादी पार्टी को बदायूं की सीट ख़तरे खतरा फिर से मड़राने लगा है ।लोगों में चर्चा हैं कि समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री आबिद रज़ा को टिकट नहीं देकर उनके साथ फिर से धोखा किया है, दूसरा धोखा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए टिकट नही देकर किया था, आंवला से टिकट न देकर पूर्व मंत्री आबिद रज़ा पर धोखे की हैट्रिक लगा दी है। पूर्व मंत्री आबिद रज़ा को अब समझ आ गया होगा कि धर्मेंद्र यादव के रहते उनके लिए सपा के आसमान में उड़ना आसान नहीं है, अब आने वाला लोकसभा चुनाव तय करेगा कि धर्मेंद्र की राजनीति बिना आबिद रज़ा के आसान है या मुश्किल।

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