
आरोपी चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह
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बदायूं के जरीफनगर थाना क्षेत्र की दहगवां चौकी पर रिश्वतखोरी का खुला खेल चल रहा था। रुपये लेकर आरोपियों के नाम मुकदमों से निकाले जा रहे थे लेकिन जिले के पुलिस अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला तब खुला, जब एंटी करप्शन टीम ने चौकी इंचार्ज को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। जब उसके कमरे में बैग की तलाशी ली गई तो उसमें 32 हजार रुपये और बरामद हुए। माना जा रहा है कि वो भी किसी से रिश्वत लेकर जमा किए गए थे।
एसआई देवेंद्र सिंह करीब चार माह पहले चौकी इंचार्ज बना था। उसके बाद से आपराधिक मामलों में जोड़तोड़ शुरू कर दी थी। कुछ स्थानीय लोगों का यह तक कहना है कि कोई मामला सामने आने पर पहले चौकी इंचार्ज एफआईआर दर्ज कराता था। उसके बाद विवेचना में खेल शुरू कर देता था।
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उसके लिए आपराधिक मामलों में आरोपियों के नाम निकालना कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन हैरानी इस बात की है कि एफआईआर में कितने आरोपियों के नाम शामिल किए गए और कितने आरोपियों के नाम निकाल दिए गए, उन्हें किस साक्ष्य आधार पर निकाला गया। कभी इसकी जांच नहीं हुई। अगर पहले इस बात की छानबीन हो जाती तो शायद चौकी इंचार्ज पहले पकड़ा जाता और लोगों को शिकायत करने का मौका नहीं मिलता।

























