उझानी। नगर में मेरे राम सेवा आश्रम पर चल रही नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव मे कथा व्यास श्री रवि जी समदर्शी महाराज ने आज तीसरे दिवस पर शिव विवाह की कथा सुनाई, जैसे ही पार्वती जी के जन्म के बारे में नारद जी को पता चला नारद जी दौड़ कर उनके हिमालय घर पर पहुंच कर पहले जगत जननी मां पार्वती को हृदय से प्रणाम किया और उसके बाद उनके माता-पिता को कहा अगर आपकी बेटी तप करें तपस्या करें तो उसे भगवान शंकर पति के रूप में प्राप्त हो सकते हैं।
पार्वती ने स्वयं वन में जाकर बहुत भारी तप किया 1000 बर्ष तक कंदमूल फल खाए 100 वर्ष तक साग खाया कुछ दिन पानी पिया फिर पानी के बबूल लिए, भारी तेज प्रकट होने लगा बेल के गिरे हुए पत्ते खाए अपर्णा कहलायि मां ने जब देखा इतना भारी तप तब उनके मुंह से ओ मां यह शब्द निकला तब उनका नाम उमा पड़ा ऐसा तप तीनों लोको में आज तक किसी ने नहीं किया।
सप्त ऋषि पार्वती की परीक्षा लेने गए तब पार्वती जी ने कहा जन्म जन्म सैकड़ों जन्मों तक मैं तपस्या करूंगी भले ही मेरा शरीर छूट जाए लेकिन मेरा हट छूट नहीं सकता मेरा हट है कि मैं शिव से ही विवाह करूंगी मेरे गुरुदेव का यही आशीष है।
शंकर जी के विवाह की तैयारियां होने लगी उनके गणों ने शंकर जी को नागों से सजाया गया, चिता भस्म शरीर पर मली गई, मृग की छाल वस्त्र के रूप में पहनाई गई भोले बाबा कहते हैं जिस आभूषण से परिवार में कलेस हो विवाद हो ऐसे आभूषण में क्या,शरीर पर चिता की राख लगाते हैं।एक ना एक दिन राख में मिलना ही है क्यों ना अभी से इसका अभ्यास किया जाए, काल जब सामने रहता है तो व्यक्ति के जीवन में अवगुण नहीं रहते भगवान याद आते हैं,भगवान शंकर का हर कार्य कुछ ना कुछ शिक्षा प्रदान करता है,
पहले देवताओं के अपने-अपने साज बरात में चले सबसे अंत में भगवान शंकर बैल पर सवार होकर जोकि धर्म का प्रतीक है हिमालय और मैना के दरवाजे पर पहुंचे आरती स्वयं फिसल कर गिर गई जिसके शीश पर शशि विराजमान हो आरती उसे छोटी हो जाती है इसलिए आरती ने शशि का सम्मान करते हुए स्वयं को बुझा दिया शंकर जी का विवाह हुआ विवाह में समस्त भूत पिशाच डाकिनी शाकिनी उपस्थित रहे सप्त ऋषि होने वेद मंत्रों के साथ शंकर जी का और पार्वती जी का विवाह कराया सब प्रसन्न है देवता फूल बरसा रहे हैं सब आशीर्वाद देते हैं शुभकामनाएं देते हैं पार्वती जी को और सजल नेत्रों से हर घर की बेटी है ऐसा स्वरूप दिखता है विदा करते हैं।
कुछ समय पश्चात उनके बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम कार्तिकेय था कार्तिकेय ने युद्ध में तारकासुर का वध किया,
गोस्वामी जी कहते हैं
शिव द्रोही मम दास कहावा l
सो नर मोहि सपनेउ नहीं भावा ll
मेरे रामजी कहते हैं जो शंकर भगवान से प्रेम नहीं करता है वह मनुष्य मुझे स्वप्न में भी पसंद नहीं है आता,शिवजी की आराधना पूजा व्रत अनुष्ठान जरूरी है।
इस अवसर पर आज भाजपा नेता ग्रीस पाल शिशोदिया, विष्णु गुप्ता एडवोकेट मोहित प्रभाकर रामनिवास शर्मा सचिन राजीव सिंह विकास चौहान लक्ष्मी गुप्ता, धर्मेन्द्र सक्सेना अनुराधा सक्सेना दीपा सक्सेना,सरिता सुनिल मिश्रा,अर्चना चौहान कमलेश मिश्रा,मोना चौधरी गुड्डी गुप्ता राखी साहू अनीता रागिनी गजेंद्र पंत सीटू शर्मा, उत्पल सक्सेना, अंकित अलंकार प्रियंका सोलंकी, नमन सैनी, अजय यादव,बाबू शाक्य,अरविंद शर्मा सहायता शर्मा, नेहा पिंकी बाबू शाक्य पूजा के समस्त कार्य आचार्य विजय शंखधार ने कराए,वाद्य यंत्रों को बजाने वाले दीपेश कुमार सत्यम शर्मा प्रवीण शुक्ला आदि भक्त उपस्थित रहे l

























