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Truck Drivers Protest; Hit And Run Law | Mumbai Bhopal Jaipur Drivers Strike | भास्कर ओपिनियन- हड़ताल: समझौते के बावजूद ट्रक ड्राइवर्स की हड़ताल ख़त्म होने पर असमंजस

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  • ट्रक ड्राइवरों का विरोध; मारो और भागो कानून | मुंबई भोपाल जयपुर ड्राइवरों की हड़ताल

2 मिनट पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, नेशनल एडिटर, दैनिक भास्कर

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ट्रक ड्राइवर की हड़ताल के बारे में केंद्र सरकार और ट्रांसपोर्टर्स के बीच सुलह हो चुकी है। दोनों पक्षों ने ड्राइवर्स से हड़ताल ख़त्म करने की अपील भी की है, लेकिन देश के कई ज़िलों में हड़ताल के बारे में अभी असमंजस है।

बुधवार को भी कई ज़िलों के कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी क़तारें लगी रहीं। हो सकता है लोग अभी भी डर में है कि हड़ताल लंबी न चल जाए, इसलिए तेल टंकियाँ फ़ुल करवा रहे होंगे। बहरहाल, हड़ताल का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।

दरअसल, हड़ताल का कारण ये है कि ड्राइवर्स नए क़ानून का विरोध कर रहे हैं। नए क़ानून के अनुसार अगर आपके वाहन से किसी को टक्कर लग जाए तो आपको इसकी सूचना फ़ोन पर देनी होगी।

क़ानून के मुताबिक़, टक्कर के बाद अगर ड्राइवर पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचना देता है तो उस ड्राइवर के खिलाफ ज़मानती धाराएँ लगेंगी, लेकिन टक्कर मारकर भाग जाता है, कोई सूचना नहीं देता है तो उसके ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती धाराएँ लगाई जाएंगी।

विरोध के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने फ़िलहाल क़ानून को लागू करने से रोकने का वादा किया है। कहा है कि फ़िलहाल हड़ताल ख़त्म कीजिए, अभी यह नया क़ानून लागू नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद ड्राइवर्स अभी मान नहीं रहे हैं। कुछ मान गए हैं, कुछ नहीं।

यही वजह है कि अब तक हड़ताल के बारे में असमंजस बना हुआ है। वजह साफ़ है कि हड़ताल ख़त्म करने के लिए जो अफ़सर ड्राइवर्स से बात कर रहे हैं, उनका तरीक़ा ठीक नहीं है। वे समझाने की बजाय ड्राइवरों को डांट रहे हैं।

मंगलवार को मध्य प्रदेश के एक अधिकारी ने ड्राइवरों को समझाने के लिए मीटिंग बुलाई। एक ड्राइवर मीटिंग में बार-बार कुछ बोल रहा था तो वो अफ़सर ड्राइवर पर भड़क उठे। कहा-क्या कर लोगे तुम? तुम्हारी औक़ात क्या है? जवाब में ड्राइवर ने कहा- यही तो बात है कि हमारी कोई औक़ात ही नहीं है। लड़ाई इसी बात की है। आप नहीं समझेंगे। कभी नहीं समझेंगे।

ठीक है वे ड्राइवर हैं। बातों को कम समझते होंगे! देर से समझते होंगे लेकिन उनसे बात करने का ये तो कोई तरीक़ा नहीं हुआ। आख़िर वे भी इंसान हैं। उन्हें भी सम्मान चाहिए। इज़्ज़त चाहिए। कम से कम इस मोड़ पर तो उन्हें सम्मान मिलना ही चाहिए।

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