होम राज्य CEC EC Appointment New Law Hearing Update | Supreme Court | सीईसी-ईसी...

CEC EC Appointment New Law Hearing Update | Supreme Court | सीईसी-ईसी की नियुक्ति वाले नए कानून पर रोक नहीं: SC ने केंद्र को नोटिस जारी किया; कहा- एक्ट के प्रावधानों की वैधता की जांच हो

नई दिल्ली36 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने शुक्रवार (12 जनवरी) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति वाले नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।

पीठ ने एक्ट के प्रावधानों की वैधता की जांच करने पर सहमति जताई, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले नए कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

पीठ ने सीईसी और ईसी की नियुक्ति वाले नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नया कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन
कांग्रेस कार्यकर्ता जया ठाकुर की दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन है क्योंकि यह चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र तंत्र (independent mechanism) प्रदान नहीं करता है।

याचिका में यह कहा भी गया है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले को पलटने के लिए बनाया गया, जिसने सीईसी और ईसी को एकतरफा नियुक्त करने की केंद्र सरकार की शक्तियां छीन ली थीं। यह वो प्रथा है जो देश की आजादी के बाद से चली आ रही है।

यह है सीईसी और ईसी की नियुक्ति का तरीका

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ के अध्यक्ष जस्टिस केएम जोसेफ ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि PM, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI का पैनल इनकी नियुक्ति करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती। चयन प्रक्रिया CBI डायरेक्टर की तर्ज पर होनी चाहिए।

केंद्र सरकार के पैनल में सीजेआई के नहीं होने पर विपक्ष का विरोध था। विपक्ष का कहना था कि यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को कम कर रही है।

चुनाव आयोग में कितने आयुक्त हो सकते हैं?
चुनाव आयुक्त कितने हो सकते हैं, इसे लेकर संविधान में कोई संख्या फिक्स नहीं की गई है। संविधान का अनुच्छेद 324 (2) कहता है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त हो सकते हैं। यह राष्ट्रपति पर निर्भर करता है कि इनकी संख्या कितनी होगी। आजादी के बाद देश में चुनाव आयोग में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त होते थे।

16 अक्टूबर 1989 को प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की। इससे चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया। ये नियुक्तियां 9वें आम चुनाव से पहली की गईं थीं। उस वक्त कहा गया कि यह मुख्य चुनाव आयुक्त आरवीएस पेरी शास्त्री के पर कतरने के लिए की गईं थीं।

2 जनवरी 1990 को वीपी सिंह सरकार ने नियमों में संशोधन किया और चुनाव आयोग को फिर से एक सदस्यीय निकाय बना दिया। एक अक्टूबर 1993 को पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने फिर अध्यादेश के जरिए दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को मंजूरी दी। तब से चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त होते हैं।

यह खबर भी पढ़ें…

चुनाव आयुक्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला फिलहाल बेअसर: सरकार के चुने आयुक्त ही कराएंगे 2024 का लोकसभा चुनाव

चुनाव आयुक्तों पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला 2024 के लोकसभा चुनाव तक बेअसर रहेगा। वहीं, फैसला लागू होने के बावजूद घुमा-फिराकर केंद्र सरकार के पसंदीदा अफसर ही चुनाव आयुक्त बनेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here