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RRS में महिलाओं की एंट्री,इस नई शाखा का नाम ‘महिला समन्वय’ रखा,2024 चुनाव से पहले हर बस्ती तक महिला संगठन बनाने में जुटा।

लखनऊ : 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) महिलाओं के बीच पहुंचने के लिए हर बस्ती तक महिला संगठन बनाने में जुट गया है। संघ ने अपनी इस नई शाखा का नाम ‘महिला समन्वय’ रखा है। इसकी शुरुआत लखनऊ, लखीमपुर खीरी और बहराइच से की गई है। पूरे प्रदेश में अब तक महानगरों में 100 से ज्यादा समितियां तैयार कर ली गई हैं। अकेले लखनऊ में 42 समितियां बनाई गई हैं।

महिला समन्वय का बड़ा सम्मेलन लखनऊ में 24 दिसंबर को होने जा रहा है। इसमें संघ के सहयोगी संगठनों के साथ प्रबुद्ध वर्ग की 2500 महिलाएं आमंत्रित की गई हैं। गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस में होने वाले मातृ शक्ति सम्मेलन में महिला समन्वय की अखिल भारतीय संयोजक मीनाक्षी पिशवे के साथ राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष शताब्दी पांडेय और सीएमएस की प्रबंधक गीता गांधी का भी संबोधन होगा। इसके बाद हर जिले में महिला सम्मेलन की योजना तैयार की जा रही है।

मातृ शक्ति सम्मेलन से जगाएगा अलख

संघ की महिलाओं में भागीदारी बढ़ाने की योजना सितंबर में लखनऊ में सह सरकार्यवाह अरुण कुमार के आने के बाद बनाई गई थी। इसके बाद तय हुआ था कि अब संघ हर जिले में अलग से महिला सम्मेलन करेगा। इसे मातृ शक्ति सम्मेलन नाम दिया गया है। इसमें बाकी सहयोगी संगठनों की भी मदद लेने की बात कही गई थी। चूंकि अभी तक संघ की कार्यपद्धति में महिलाओं का सीधा दखल नहीं है। सिर्फ राष्ट्र सेविका समिति के दरवाजे ही उनके लिए खुले हैं। अब संघ के साथ ही सहयोगी संगठनों में भी प्रमुख पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। जल्द महिलाओं के बीच भी फुल टाइमर विस्तारक भी भेजी जाएंगी। संघ 2025 में अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रहा है। इसमें यूपी के सभी गांवों तक शाखाएं बढ़ाने के साथ सभी वर्गों के बीच अपना काम बढ़ाने पर फोकस किया गया है।

स्थानीय मुद्दों के साथ लीडरशिप तलाशने पर फोकस

संघ की महिला समन्वय की अवध प्रांत संयोजक डॉ. शुचिता चतुर्वेदी बताती हैं कि इस सम्मेलन में स्थानीय मुद्दों के साथ महिला लीडरशिप तलाशने पर फोकस किया जाएगा। वह बताती हैं कि महिलाओं के लिए बनी सरकार की योजनाएं कई क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पातीं। इन्हें कैसे पहुंचाया जाए, इस पर भी बात होगी। भारतीयता को हर महिला के भीतर कैसे पहुंचाया जाए, यह सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य होगा।

क्यों महिलाओं के बीच पैठ बना रहा संघ?

संघ अपनी महिला विरोधी होने की छवि को लगातार तोड़ने में जुटा है। दरअसल, कांग्रेस समेत विपक्षी दल यह आरोप लगाते रहते हैं कि संघ की शाखाओं में सिर्फ पुरुष ही दिखाई पड़ते हैं, महिलाएं नहीं। इसलिए संघ ने महिला समन्वय के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर काम शुरू किया है। यही नहीं संघ भले सीधे राजनीति में दखल न दे, पर वह वैचारिक तौर पर बीजेपी के साथ खड़ा रहता है। यह माना जा रहा है कि हाल में हुए तीन राज्यों के चुनावों में बीजेपी को मिली जीत के पीछे महिला वोटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस वजह से संघ भी अपनी भागीदारी आधी आबादी के बीच पहुंचाने में जुट गया है। संघ का मानना है कि बिना महिलाओं तक बात पहुंचाएं उसकी विचारधारा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।

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